राजस्थान
2 घंटे पहले
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित प्रतिष्ठित पीबीएम (PBM) अस्पताल एक बार फिर अपनी लचर स्वास्थ्य सेवाओं और प्रबंधन की कार्यशैली के कारण चर्चा में है। यहाँ एक मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी 17 घंटे तक बेड नसीब नहीं हुआ। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा विभाग की इस कथित लापरवाही के चलते मरीज को अपनी जान गंवानी पड़ी। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद किसी ने उनकी सुध नहीं ली और मरीज मजबूरन अटेंडेंट के लिए आरक्षित साइड बेड पर ही तड़पता रहा। अंततः काफी जद्दोजहद के बाद 13 अक्टूबर की शाम 7 बजे उसे बेड मुहैया कराया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीडूंगरगढ़ के पूनरासर गांव के रहने वाले राधेश्याम को 12 अक्टूबर की देर रात करीब 2:30 बजे पीबीएम अस्पताल की नई मेडिसिन विंग के जी वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टर विजय तुंडवाल की यूनिट में भर्ती होने के बावजूद उन्हें पूरे 17 घंटे तक अस्पताल में कोई खाली बेड नहीं दिया गया। मरीज को अटेंडेंट के बैठने के लिए रखे गए संकीर्ण साइड बेड पर ही लेटने के लिए मजबूर किया गया, जो किसी भी मरीज के लिए उचित नहीं है। परिवार के सदस्यों ने कई बार नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों से इस संबंध में शिकायत की, लेकिन उनकी अनदेखी की गई।
सीने में दर्द और डॉक्टरों की उदासीनता
मरीज के परिजनों ने बताया कि 13 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे राधेश्याम को अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ। उन्होंने तुरंत ड्यूटी पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर को सूचित किया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने इसे महज एक वहम करार देकर टाल दिया और सिर्फ एक इंजेक्शन लगाकर वहां से चले गए। इसके बाद राधेश्याम की स्थिति और भी बिगड़ने लगी। जब परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे तत्काल आईसीयू में शिफ्ट करने का आग्रह किया, तो स्टाफ ने बहाना बनाया कि वहां बेड खाली नहीं है।
अंत में हुई मौत, शुरू हुई जांच
काफी मशक्कत के बाद अंततः राधेश्याम को आईसीयू-2 के बेड नंबर 3 पर वेंटिलेटर सुविधा के साथ शिफ्ट किया गया। हालांकि, तब तक संक्रमण और तकलीफ इतनी बढ़ चुकी थी कि उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई थी। आखिरकार 13 अक्टूबर की दोपहर करीब 3 बजे इलाज के दौरान राधेश्याम ने दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। मरीज के भाई विष्णु दत्त ने अस्पताल अधीक्षक को औपचारिक पत्र सौंपकर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में गंभीर लापरवाही और अनदेखी के आरोप लगाए हैं। परिजनों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल अधीक्षक ने एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। अब इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज की मौत वास्तव में चिकित्सकीय चूक का परिणाम थी या फिर अस्पताल के संसाधनों में कमी का असर।
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