बिहार की बाघिन ने भरी हवाई उड़ान, भारतीय वायु सेना की मदद से पहुंची बक्सा टाइगर रिजर्व भारत 3 घंटे पहले 7
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बिहार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को भारतीय वायु सेना के विमान से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व भेजा है।

बिहार से बंगाल तक का ऐतिहासिक सफर

बिहार के वन्यजीव संरक्षण अभियान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक मादा बाघ को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान के जरिए पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व स्थानांतरित किया गया है। यह पहली बार है जब बिहार से किसी बाघ को किसी अन्य राज्य के रिजर्व में संरक्षण और पुनर्वास के लिए भेजा गया है। इस पूरी प्रक्रिया ने देश में बाघों के प्रबंधन के लिए एक नया उदाहरण पेश किया है।

ऑपरेशन का घटनाक्रम

इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया को बेहद सावधानी और पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया। 29 सितंबर की शाम करीब 5 बजे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों ने बाघिन को बेहोश कर उसे रेडियो-कॉलर पहनाया। इसके बाद, सभी आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल और वन्यजीव नियमों का पालन करते हुए उसे सड़क मार्ग से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया। यहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान ने उड़ान भरी और बाघिन को पश्चिम बंगाल ले गया। सफर के अगले दिन, यानी 30 सितंबर की सुबह 8 बजे, बाघिन को बक्सा टाइगर रिजर्व के सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में सुरक्षित उतार दिया गया। कुल मिलाकर, इस चुनौतीपूर्ण काम को करीब 15 घंटे के अंतराल में पूरा कर लिया गया।

एनक्लोजर में निगरानी

बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचने के बाद बाघिन को फिलहाल एक खास एनक्लोजर में रखा गया है। वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ लगातार उसके स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं और यह देख रहे हैं कि वह अपने नए वातावरण के साथ कितनी जल्दी तालमेल बिठा पा रही है। योजना के अनुसार, 2 अक्टूबर को उसे इस एनक्लोजर से निकालकर खुले जंगल के बड़े हिस्से में छोड़ दिया जाएगा।

टीम वर्क की सफलता

इस बड़े मिशन को सफल बनाने में कई विभागों और संस्थाओं ने आपसी समन्वय दिखाया। इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल वन विभाग के अलावा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय वायु सेना का अहम योगदान रहा। पशु चिकित्सकों से लेकर मैदानी वनकर्मियों तक, हर किसी ने तय किए गए अंतरराष्ट्रीय मानकों और वन्यजीव प्रबंधन के प्रोटोकॉल का पालन किया।

बाघ संरक्षण का महत्व

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के तराई वन क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान रखता है और बिहार में बाघों के संरक्षण का मुख्य आधार है। देश में दुनिया के 70 फीसदी से अधिक बाघ मौजूद हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार प्रोजेक्ट टाइगर जैसी योजनाएं चला रही है। हालांकि, तेजी से कम होते जंगलों के कारण बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में बाघों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना और उनके रिहायशी इलाकों को संतुलित करना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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