सुल्तानगंज-अगुवानी पुल पर फिर लगा ब्रेक, जानिए कब तक पूरा होगा निर्माण और क्या है ताजा स्थिति बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार का बहुचर्चित सुल्तानगंज-अगुवानी पुल एक बार फिर काम रुकने के कारण चर्चा में है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने निर्माण कार्य को चार महीने के लिए ठप कर दिया है, जिसके चलते अब 2027 की नई समयसीमा पर भी सवाल उठ रहे हैं।

गंगा का जलस्तर बना रुकावट

बिहार के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गिना जाने वाला सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल फिर से संकट में घिर गया है। हाल ही में इस पुल के निर्माण कार्य को एक बार फिर रोक दिया गया है। इसकी मुख्य वजह गंगा नदी में तेजी से बढ़ता हुआ जलस्तर है। परियोजना से जुड़े अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ जैसी स्थिति और नदी में पानी की बढ़ती मात्रा के कारण फिलहाल काम को जारी रखना तकनीकी रूप से काफी जोखिम भरा है। इसे देखते हुए निर्माण गतिविधियों को अगले 4 महीने के लिए पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है।

लगातार हादसों का रहा है इतिहास

यह पुल अपनी मजबूती के बजाय अपने बार-बार ढहने के कारण सुर्खियों में रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस पुल का सुपरस्ट्रक्चर गंगा नदी में कुल 3 बार गिर चुका है। कभी तेज हवाओं के चलते तो कभी निर्माण डिजाइन में रही तकनीकी खामियों के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, इसके बाद IIT रुड़की से नया डिजाइन तैयार करवाया गया था, जिसके आधार पर काम ने गति पकड़ी थी, लेकिन कुदरती बाधाओं ने फिर से इस प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा दिया है।

परियोजना की सुस्त चाल और 2027 की डेडलाइन

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। तत्कालीन प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस पुल को वर्ष 2020 तक बनकर तैयार हो जाना चाहिए था। लेकिन बार-बार हुए हादसों और निर्माण कार्य में आई रुकावटों ने इस लक्ष्य को बहुत पीछे धकेल दिया है। 1710 करोड़ रुपये की भारी भरकम लागत से तैयार हो रहे इस 3.16 किलोमीटर लंबे पुल को पूरा करने के लिए अब 2027 की नई डेडलाइन तय की गई है। हालांकि, जिस तरह से बार-बार काम रुक रहा है, उसे देखते हुए तय समय पर इसका पूरा होना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल ही में अगुवानी की तरफ एप्रोच रोड बनाने का काम तेज किया गया था और टूटे हुए हिस्सों को फिर से खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अब बाढ़ के कारण अधूरी रह गई है।

खास आकर्षण: डॉल्फिन वेधशाला

अपनी तकनीकी जटिलताओं के साथ-साथ यह पुल अपनी अनूठी योजना के लिए भी जाना जाता है। इस पुल के पाया नंबर 10 पर एक खास ‘डॉल्फिन वेधशाला’ का निर्माण किया जा रहा है। इस वेधशाला का उद्देश्य पर्यटकों को गंगा में अठखेलियां करती राष्ट्रीय जलीय जीव, यानी गांगेय डॉल्फिन को करीब से देखने का अनुभव प्रदान करना है। पुल पूरा होने के बाद लोग यहां ठहरकर गंगा की प्राकृतिक सुंदरता और डॉल्फिन को निहार सकेंगे।

कनेक्टिविटी के लिए क्यों है जरूरी?

सुल्तानगंज-अगुवानी पुल के बनने से बिहार के आधारभूत ढांचे में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इसके बन जाने से भागलपुर और खगड़िया जिलों के बीच की दूरी काफी हद तक कम हो जाएगी। केवल दो जिलों के बीच ही नहीं, बल्कि यह पुल उत्तर बिहार और अंग क्षेत्र के निवासियों के लिए झारखंड की राह भी आसान बनाएगा। एक बार यह मार्ग शुरू हो जाने पर आवागमन सुगम और सुरक्षित होगा, जिससे लोगों का काफी कीमती समय बचेगा। वर्तमान में हर कोई इस उम्मीद में है कि प्राकृतिक बाधाएं खत्म हों और निर्माण कार्य बिना किसी और देरी के अपने मुकाम तक पहुंच सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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