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6 दिन पहले
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बटुक भैरव जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान शिव के बाल स्वरूप की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इसी तिथि पर मां काली के रौद्र रूप को शांत करने के उद्देश्य से भगवान शिव ने बटुक भैरव का रूप धारण किया था।
क्यों लिया भगवान शिव ने बालक का रूप
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां काली के उग्र और रौद्र रूप को शांत करने के लिए भगवान शिव ने 5 साल के एक बालक का स्वरूप धारण किया था, जिसे बटुक भैरव के नाम से जाना जाता है। बटुक भैरव को सतगुण से युक्त देवता माना जाता है। ऐसी आस्था है कि जो भक्त सच्चे मन से बटुक भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन में हर तरह के सुख और साधन-संपन्नता का आगमन होता है।
बटुक भैरव जयंती 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि 23 जून मंगलवार को शाम 04 बजकर 39 मिनट से आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन 24 जून बुधवार को शाम 06:12 पी एम पर समाप्त होगी।
उदयातिथि के आधार पर देखें तो बटुक भैरव जयंती का पर्व 24 जून बुधवार को मनाया जाएगा।
शुभ योगों का संयोग
इस वर्ष बटुक भैरव जयंती का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि इस अवसर पर 3 शुभ योगों का संयोग बन रहा है। ऐसे योगों में की गई पूजा-उपासना का विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है।
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