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6 घंटे पहले
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विचारों
पाकिस्तान के साथ राजनयिक रिश्तों पर बड़ा बयान
बांग्लादेश के वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील मोहसेन राशिद ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि ढाका को पाकिस्तान के साथ अपने सभी प्रकार के राजनयिक और सुरक्षा संबंधी रिश्तों को तब तक के लिए रोक देना चाहिए, जब तक कि इस्लामाबाद में पूर्ण रूप से लोकतंत्र की बहाली नहीं हो जाती। राशिद का मानना है कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना बांग्लादेश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने यह बात बांग्लादेश के एक समाचार पोर्टल को दिए विशेष साक्षात्कार में कही है।
पुलिस और सुरक्षा संस्थाओं में भरोसे की कमी
साक्षात्कार के दौरान राशिद ने बांग्लादेश में व्याप्त राजनीतिक अस्थिरता और कानून-व्यवस्था के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में राज्य की कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रति जनता का विश्वास पूरी तरह से हिल गया है। विशेष रूप से वर्ष 2024 के बाद से फैली हिंसक घटनाओं में पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों और उनकी हत्याओं ने सुरक्षा तंत्र का मनोबल तोड़ दिया है। राशिद का कहना है कि इन घटनाओं की यदि निष्पक्ष और विस्तृत जांच नहीं कराई गई, तो सुरक्षा बलों के भीतर का असंतोष और गहरा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि राज्य को पुलिस का सम्मान और अधिकार दोबारा बहाल करने होंगे, साथ ही किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के लिए जवाबदेही भी तय करनी होगी। उन्होंने वर्दी और संस्थागत ढांचे में बार-बार किए जा रहे बदलावों को नाकाफी बताते हुए कहा कि केवल दिखावटी बदलाव से पेशेवर क्षमता में सुधार नहीं आता।
सशस्त्र बलों के खिलाफ कार्रवाई पर गंभीर सवाल
मोहसेन राशिद ने उन सैन्य अधिकारियों के प्रति सहानुभूति और समर्थन व्यक्त किया, जिन्हें 2024 के दौरान हुए राजनीतिक हंगामे के बीच अपने कर्तव्य निभाने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्यकर्मी एक अनुशासित कमांड सिस्टम के अधीन कार्य करते हैं, जहाँ उन्हें ऊपरी अधिकारियों के आदेशों का पालन करना होता है। ऐसे में ड्यूटी करने वाले सैनिकों को सामान्य अपराधी की तरह देखना अनुचित है। राशिद ने कहा कि सेना की प्राथमिक जिम्मेदारी देश की संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा करना है और इस प्रक्रिया में अनुशासन बनाए रखना उनकी पेशेवर अनिवार्यता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हिंसा के दौरान मारे गए लोगों के आंकड़ों को लेकर चल रहे दावों की भी स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच की मांग की है।
शेख हसीना की संभावित वापसी और सुरक्षा का मुद्दा
बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा करते हुए राशिद ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सुरक्षा के प्रति सरकार को आगाह किया। उन्होंने कहा कि हसीना को शारीरिक नुकसान पहुंचाने का कोई भी प्रयास देश की शांति के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यदि शेख हसीना बांग्लादेश लौटती हैं, तो उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन को लेनी चाहिए। राशिद ने इस विषय पर सभी राजनीतिक दलों के बीच संवाद की वकालत की। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शेख हसीना को कानूनी रूप से भगोड़ा घोषित करने का मामला भी पेचीदा है, क्योंकि तत्कालीन संकट के दौरान सुरक्षा प्रतिष्ठान ही उन्हें देश से बाहर ले गए थे। अब वापसी की प्रक्रिया को लेकर भारत और बांग्लादेश के अधिकारियों के बीच समन्वय और स्पष्ट कानूनी रूपरेखा तैयार करना आवश्यक है ताकि इसे एक शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान के तौर पर देखा जा सके।
पाकिस्तान के साथ सहयोग की रणनीतिक विफलता
इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर राशिद का रुख सबसे अधिक कड़ा था। उन्होंने हाल ही में हुए उस समझौते पर सवाल उठाया, जिसमें बांग्लादेश और पाकिस्तान ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सहयोग करने का निर्णय लिया है। राशिद का मानना है कि पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र में वहां की सेना का अत्यधिक प्रभाव है, जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते के रणनीतिक आधार को संदिग्ध बनाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि नशीले पदार्थों की आड़ में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को बांग्लादेश के भीतर पैर पसारने का मौका नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी प्रश्न खड़ा किया कि क्या बांग्लादेश में आने वाली नशीले पदार्थों की खेप का मुख्य स्रोत वाकई पाकिस्तान है, जबकि तस्करी के अन्य विकल्प भी मौजूद हो सकते हैं। उनके अनुसार, जिस देश में सेना का दखल नागरिक शासन से ज्यादा हो, वहां सुरक्षा सहयोग बढ़ाना बांग्लादेश की बड़ी भूल हो सकती है।
राष्ट्रीय जिम्मेदारी और राजनीतिक संयम की आवश्यकता
आने वाले दिसंबर के महीने को लेकर राशिद ने राजनीतिक संवेदनशीलता जताते हुए कहा कि सरकार को किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी। उन्होंने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार से कहा कि वह राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी में न बदलने दे। यदि शेख हसीना वापस आती हैं, तो उनके स्वागत या उनके खिलाफ होने वाली कानूनी प्रक्रिया को बेहद गरिमापूर्ण और संवैधानिक तरीके से संचालित करना चाहिए। जमात-ए-इस्लामी जैसे दलों को भी देश की स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए संयम बरतना होगा। अंत में, राशिद ने संदेश दिया कि बांग्लादेश का असली विकास तभी संभव है जब संस्थाएं मजबूत होंगी, कानून का शासन होगा और विदेशी नीति में स्पष्टता आएगी। उन्होंने पाकिस्तान से तब तक दूरी बनाए रखने पर जोर दिया जब तक वहां की व्यवस्था वास्तव में लोकतांत्रिक न हो जाए।
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