रणजी ट्रॉफी से पहले अरुणाचल प्रदेश की टीम पर संकट, कानूनी विवाद के कारण शुरुआती मैच से बाहर खेल 9 घंटे पहले 6
रणजी ट्रॉफी में अरुणाचल प्रदेश की टीम के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के आंतरिक विवाद और अदालत में मामला लंबित होने के चलते टीम नागालैंड के खिलाफ अपना पहला मुकाबला नहीं खेल पाएगी।

रणजी ट्रॉफी में बड़ा झटका

घरेलू क्रिकेट के नए सत्र के आगाज के साथ ही अरुणाचल प्रदेश की क्रिकेट टीम के लिए निराशाजनक समाचार आया है। राज्य क्रिकेट बोर्ड के भीतर जारी आपसी खींचतान और कानूनी पेचीदगियों के कारण टीम नागालैंड के विरुद्ध होने वाले अपने पहले रणजी ट्रॉफी मैच से बाहर हो गई है। यह महत्वपूर्ण मुकाबला 11 अक्टूबर से अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाना प्रस्तावित था। केवल रणजी ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि टीम सीके नायडू ट्रॉफी के अंतर्गत मेघालय के साथ होने वाले अपने पहले मैच में भी भाग नहीं ले सकेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भी इन मुकाबलों के रद्द किए जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस कानूनी संघर्ष और प्रशासनिक गतिरोध का सबसे गहरा प्रभाव उन प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों पर पड़ रहा है, जिनका खेल करियर इस अनिश्चितता के कारण अधर में लटक गया है।

विवाद की जड़ क्या है

क्रिकबज की एक रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा यह नुकसान राज्य क्रिकेट संघ के भीतर मचे घमासान का नतीजा है। दरअसल, अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ARCA) के हालिया चुनावों को लेकर दो गुटों के बीच गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। कई जिला स्तर के क्रिकेट एसोसिएशनों द्वारा चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगाए गए हैं, जिसके चलते यह मसला अब कानूनी रूप ले चुका है और गुवाहाटी हाईकोर्ट की ईटानगर बेंच में लंबित है।

सीनियर खिलाड़ी ने जताई चिंता

न्यायालय में मामला विचाराधीन होने और स्टे ऑर्डर की स्थिति के कारण वर्तमान में राज्य क्रिकेट बोर्ड में कोई भी आधिकारिक और वैध कमेटी सक्रिय रूप से कार्य करने में असमर्थ है। इस प्रशासनिक शून्यता का परिणाम यह हुआ है कि टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों का चयन ही नहीं हो सका। टीम के सीनियर खिलाड़ी तेची नेरी ने इस स्थिति की भयावहता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अभी भी ईटानगर में अटके हुए हैं। किसी भी खिलाड़ी का चयन नहीं हुआ है और न ही आगामी चुनौतियों के लिए कोई प्रशिक्षण शिविर या अभ्यास सत्र आयोजित किया गया है।

खिलाड़ियों का भविष्य खतरे में

इस आपसी कलह और अदालती दांव-पेंचों का सीधा और नकारात्मक असर उन युवा एवं पेशेवर खिलाड़ियों पर पड़ रहा है, जिनका इस विवाद से कोई प्रत्यक्ष सरोकार नहीं है। खिलाड़ियों का स्पष्ट मानना है कि क्रिकेट ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। इस प्रशासनिक संकट की आंच जूनियर क्रिकेट पर भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। इससे पहले राज्य की अंडर-19 टीम भी वीनू मांकड़ ट्रॉफी जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से वंचित रह गई थी, जो राज्य के खेल भविष्य के लिए एक चिंता का विषय है।

विवेक शर्मा पाबना के खेल संवाददाता हैं, जो क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की खबरें कवर करते हैं। मैचों के विश्लेषण, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और टूर्नामेंट्स पर उनकी गहरी पकड़ है। वे खेल प्रेमियों के लिए हर बड़ी खबर तेजी और सटीकता के साथ लाते हैं।

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