अनंत अंबानी का ₹1 लाख करोड़ का मेगा प्लान, सूखे रयालसीमा को ‘ग्लोबल फ्रूट बाउल’ बनाने की तैयारी, सीएम चंद्रबाबू नायडू बोले- बदलेगी किसानों की तकदीर राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 6
आंध्र प्रदेश के रयालसीमा क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और रिलायंस के अनंत अंबानी ने 1 लाख करोड़ रुपये के हॉर्टिकल्चर हब का शिलान्यास किया है, जिससे यह सूखाग्रस्त क्षेत्र ग्लोबल फ्रूट बाउल बनेगा।

आंध्र प्रदेश के सूखा प्रभावित रयालसीमा क्षेत्र के विकास और वहां के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अन्नामैया जिले के मदनपल्ले में 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ऐतिहासिक ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब और इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की आधारशिला रखी है। इस भव्य और महत्वपूर्ण समारोह में आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, राज्य के मंत्री नारा लोकेश और रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस ऐतिहासिक परियोजना का मुख्य उद्देश्य रयालसीमा क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर एक ग्लोबल फ्रूट बाउल (वैश्विक फल केंद्र) के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक कृषि परियोजना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी क्रांतिकारी पहल है जो इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक तकदीर को पूरी तरह से बदल कर रख देगी। इस दूरदर्शी योजना के तहत बागवानी, सिंचाई, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), रसद (लॉजिस्टिक्स) और निर्यात को एक ही मंच पर लाया जाएगा, जिससे न केवल किसानों की आय कई गुना बढ़ेगी बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन भी होगा।

1 लाख करोड़ रुपये के इस मेगा प्रोजेक्ट का पूरा खाका

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जनसभा को संबोधित करते हुए इस महापरियोजना की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि यह परियोजना एक अत्यंत सुदृढ़ और एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र (इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम) का निर्माण करेगी, जिसमें फसलों के रोपण से लेकर उनके वैश्विक विपणन और निर्यात तक की सभी कड़ियों को आपस में जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का क्रियान्वयन रयालसीमा क्षेत्र के कुल 10 जिलों में किया जाएगा।

परियोजना की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

  • इसके अंतर्गत कुल 5,860 गांवों को कवर किया जाएगा।
  • इन सभी गांवों को सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए कुल 201 क्लस्टर्स में विभाजित किया गया है।
  • परियोजना में सरकार की ओर से लगभग 40,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
  • इसके अतिरिक्त, निजी क्षेत्र से करीब 60,000 करोड़ रुपये का निवेश जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इस महाभियान के माध्यम से क्षेत्र की अतिरिक्त 6-लाख एकड़ भूमि को बागवानी की खेती के तहत लाया जाएगा।

इस बड़े निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से रयालसीमा के किसानों को आधुनिक तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और सीधे बड़े बाजारों तक निर्बाध पहुंच प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी उपज सुरक्षित रहेगी और उन्हें उनकी मेहनत का अधिकतम मूल्य मिल सकेगा।

सूखे रयालसीमा में किसान कैसे उगाएंगे सेब, कीवी और सोना?

रयालसीमा क्षेत्र अपनी शुष्क जलवायु और पानी की कमी के लिए जाना जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री नायडू ने इस क्षेत्र की मिट्टी की ताकत और किसानों की मेहनत पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को सही सिंचाई सुविधाएं और उचित बाजार समर्थन मिल जाए, तो इस क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं छिपी हुई हैं। उन्होंने कहा, "हम रयालसीमा के विकास की दिशा को हमेशा के लिए बदलने के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अभूतपूर्व सहयोग से हम इस सूखे इलाके को एक वैश्विक बागवानी केंद्र में तब्दील करने जा रहे हैं।"

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्राथमिक क्षेत्र (प्राइमरी सेक्टर) के विकास में बागवानी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। रयालसीमा की मिट्टी में वह क्षमता है कि यहां के किसान सेब, स्ट्रॉबेरी, केला, एवोकैडो, कीवी और खजूर जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों का सफलतापूर्वक उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, "यदि हमारे किसानों को सही समय पर और पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का पानी मिल जाए, तो रयालसीमा के मेहनती लोग इस सूखी मिट्टी से भी सोना उगा सकते हैं। यदि उन्हें सही विपणन (मार्केटिंग) की सुविधा मिल जाए, तो वे अपने लिए अपार समृद्धि और संपत्ति खड़ी कर सकते हैं।"

'सीड टू शिपमेंट' मॉडल से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

इस विशाल परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका अनूठा और आधुनिक संचालन मॉडल है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पूरी परियोजना 'सीड टू शिपमेंट' (बीज से लेकर निर्यात) मॉडल पर काम करेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि किसानों को फसल चक्र के हर चरण में सीधे सहायता और कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इस मॉडल की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • किसानों को फसल के बीज बोने के समय से लेकर फसल की कटाई और उसे विदेशी बाजारों में भेजने तक की पूरी मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) से सीधे जोड़ा जाएगा।
  • किसानों की उपज को सीधे फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज, त्वरित परिवहन और अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजारों से लिंक किया जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी।
  • पानी की अत्यधिक बचत करने और प्रति एकड़ उत्पादकता बढ़ाने के लिए ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) तकनीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
  • मौसम के मिजाज और जलवायु परिवर्तन के खतरों से फसलों को बचाने के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पैदावार को स्थिर और सुरक्षित रखा जा सकेगा।

सिंचाई संकट से निपटने के लिए 35,000 करोड़ रुपये की योजना

रयालसीमा में कृषि और बागवानी की सफलता पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने क्षेत्र के जल संकट को दूर करने के लिए अपनी सरकार की ठोस कार्ययोजना साझा की। उन्होंने कहा कि महान नेता एनटी रामा राव के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई ऐतिहासिक सिंचाई परियोजनाओं को अब बहुत तेजी से पूरा किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से हंद्री-नीवा और गालेरू-नगरी जैसी महत्वपूर्ण नहर प्रणालियां शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित बड़े लक्ष्यों की घोषणा की:

  • सरकार करीब 35,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से कुल 36 प्राथमिक सिंचाई परियोजनाओं को अगले तीन वर्षों के भीतर हर हाल में पूरा करेगी।
  • नदियों को आपस में जोड़ने (रिवर इंटरलिंकिंग) और बेसिन ट्रांसफर (एक बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी भेजने) की प्रक्रिया को गति दी जाएगी ताकि सूखाग्रस्त क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जा सके।
  • दक्षिण भारत के राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पानी के आपसी विवादों को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
  • पोलावरम परियोजना को तेजी से पूरा करने और पूरे राज्य में पीने व सिंचाई के पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार अपनी पूरी ताकत लगा रही है।

'मुझे आंध्र प्रदेश का बेटा समझिए' - भावुक हुए अनंत अंबानी

इस ऐतिहासिक शिलान्यास समारोह के मंच से रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने राज्य सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपना गहरा आदर और प्रेम व्यक्त किया। उन्होंने रिलायंस समूह को इस ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी परियोजना का हिस्सा बनाने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। अनंत अंबानी ने कहा, "मैं रिलायंस पर इतना बड़ा विश्वास जताने और हमें इस अभूतपूर्व यात्रा में सहभागी बनाने के लिए मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं। मदनपल्ले में स्थापित हो रहे 'इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर' में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ साझेदारी करना हमारे लिए बहुत बड़े गौरव की बात है। हम इस शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थान को स्थापित करने में अपना सर्वश्रेष्ठ और पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे।"

समारोह में उपस्थित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अनंत अंबानी बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "कृपया मुझे केवल एक उद्योगपति न समझें, बल्कि मुझे आंध्र प्रदेश का ही एक बेटा समझें। आप बस मेरा मार्गदर्शन करें और मुझे बताएं कि हम आंध्र प्रदेश के चहुंमुखी विकास और यहां की जनता की सेवा में किस प्रकार और अधिक योगदान दे सकते हैं। हम राज्य के लोगों के कल्याण और यहां की प्रगति के लिए हर संभव मदद करने को हमेशा तत्पर रहेंगे।"

अनंत अंबानी के इस आत्मीय और भावुक संबोधन का वहां उपस्थित जनसमुदाय ने खड़े होकर और गड़गड़ाहट भरी तालियों के साथ स्वागत किया। इसके तुरंत बाद, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी मंच से घोषणा की कि आज से अनंत अंबानी को आंध्र प्रदेश का अपना बेटा ही माना जाएगा।

मदनपल्ले का 'इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर' कैसे बदलेगा खेती का भविष्य?

मदनपल्ले में प्रस्तावित 'इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर' (आईएसए) की स्थापना रिलायंस इंडस्ट्रीज के विशेष सहयोग से की जा रही है। यह अत्याधुनिक संस्थान देश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों के परिदृश्य को बदलने में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस संस्थान की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली इस प्रकार होंगी:

  • यह संस्थान पूरी तरह से एडवांस्ड एग्रीकल्चर एजुकेशन (उच्च कृषि शिक्षा), व्यावहारिक अनुसंधान और डिजिटल तकनीकों के खेतों तक हस्तांतरण पर केंद्रित होगा।
  • संस्थान का प्राथमिक उद्देश्य कृषि क्षेत्र के नए लीडर्स और विशेषज्ञों को तैयार करना है जो पारंपरिक खेती को आधुनिक व्यवसाय में बदल सकें।
  • यहां AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), प्रेसिजन फार्मिंग (सटीक खेती), एग्री-बिजनेस (कृषि व्यवसाय) और जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट-रेजिलिएंट) खेती की तकनीकों पर वैश्विक स्तर का अनुसंधान किया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री नायडू ने विश्वास जताया कि यह संस्थान आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं के निष्कर्षों और खेतों में काम करने वाले किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं के बीच एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय कड़ी साबित होगा।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस अवसर पर गुजरात के जामनगर में अनंत अंबानी द्वारा स्थापित किए गए प्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण प्रोजेक्ट 'वनतारा' की भी खुले दिल से प्रशंसा की। इसके साथ ही, उन्होंने तिरुमला के पवित्र मंदिर के सुचारू संचालन के लिए अनंत अंबानी द्वारा दान में दी गई अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उनके गहरे पर्यावरण प्रेम और धार्मिक आस्था की भी सराहना की।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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