अमेरिका में अनोखी घटना: महिला कैदी को दिए जहर के दो-दो इंजेक्शन, लेकिन मौत के बजाय खर्राटे मारकर सोती रही हत्यारी विश्व 4 घंटे पहले 4
अमेरिका के टेनेसी राज्य में एक महिला कैदी को मौत की सजा देने का प्रयास पूरी तरह विफल रहा, जहां दो बार जहर का घातक इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी वह जीवित बच गई और गहरी नींद में सो गई।

अमेरिका के टेनेसी राज्य से एक बेहद ही हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के कानूनी और चिकित्सा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। यहां जेल प्रशासन द्वारा एक दोषी महिला को मौत की सजा देने का प्रयास पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ। 50 वर्षीय क्रिस्टी गेल पाइक को जहर का घातक इंजेक्शन दिया गया था, लेकिन वह इस जानलेवा प्रक्रिया के बाद भी जिंदा बच गईं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मौत के मुंह में जाने के बजाय वह आराम से सोती रहीं और गहरी सांसें लेते हुए खर्राटे भरती रहीं। इस पूरी घटना को वहां मौजूद गवाहों और कानून विशेषज्ञों ने इतिहास का सबसे असाधारण और बेमिसाल मामला बताया है।

टेनेसी की जेल में हुआ हैरान करने वाला वाकया

बुधवार के दिन टेनेसी में सजा-ए-मौत के इस मामले ने एक नया इतिहास रचने की दहलीज पार की थी, लेकिन अंत में सब कुछ बदल गया। 1995 के एक बेहद चर्चित और जघन्य हत्याकांड के मामले में क्रिस्टी गेल पाइक को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उन्हें सुबह 10 बजे मौत के घाट उतारा जाना था। यदि यह प्रक्रिया सफल हो जाती, तो पाइक पिछले 200 वर्षों में टेनेसी राज्य के इतिहास में सजा-ए-मौत पाने वाली पहली महिला बन जातीं। हालांकि, सजा के ठीक पहले कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी, जिससे जेल अधिकारियों की योजना कुछ समय के लिए टल गई। बाद में मामला देश की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से इस रोक को हटा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद रात के वक्त जेल अधिकारियों ने सजा की प्रक्रिया दोबारा शुरू की और पाइक को पेंटोबार्बिटल नामक घातक दवा की दो खुराक दीं।

जहर देने के बाद भी खर्राटे भरती रही कैदी

जेल के भीतर गवाहों के सामने जब पर्दा उठाया गया, तो सब कुछ सामान्य प्रक्रिया जैसा दिख रहा था। क्रिस्टी गेल पाइक को पूरी तरह से स्ट्रेचर पर बांधा गया था। उन्होंने दुनिया से विदा लेने से पहले अपने आखिरी शब्द कहे, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वह इस दुनिया से शांति और प्यार के साथ विदा हो रही हैं। लेकिन जैसे ही उन्हें जहर का पहला इंजेक्शन दिया गया, स्थिति पूरी तरह असामान्य हो गई। पाइक बेहोश होने या मरने के बजाय लगातार जागती रहीं। उन्होंने स्ट्रेचर पर बंधे होने के बावजूद अपना सिर उठाया और वहां खड़े जेल अधिकारियों से पूछा कि क्या इस दवा का असर उन्हें अपने हाथ में महसूस होना चाहिए।

इसके बाद अधिकारियों ने स्थिति को देखते हुए जहर की दूसरी खुराक यानी दूसरा इंजेक्शन भी दे दिया। लेकिन इस दूसरी खुराक का असर भी पूरी तरह से उल्टा हुआ। पाइक मरने के बजाय गहरी नींद में चली गईं और जोर-जोर से खर्राटे लेने लगीं। यह नजारा देखकर वहां खड़े जेल अधिकारियों और डॉक्टरों के होश उड़ गए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उनकी सांसें चलती रहीं, तो उन्हें तुरंत एक एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाना पड़ा।

गले में फंसी रह गई मौत और शुरू हुई कानूनी बहस

क्रिस्टी गेल पाइक के वकीलों ने इस घटना के तुरंत बाद पुष्टि की कि उनकी मुवक्किल अभी भी जीवित हैं और अस्पताल में भर्ती हैं, जहां वे गहरी सांसें ले रही हैं। मौत की सजा से जुड़े मामलों की जानी-मानी विशेषज्ञ रॉबिन महेर ने इस पूरी घटना को बेहद अनोखा और बेमिसाल करार दिया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां डॉक्टरों को कैदी की नसें ढूंढने में भारी मशक्कत करनी पड़ी हो और इस वजह से प्रक्रिया में देरी हुई हो। लेकिन एक बार दवा के शरीर में चले जाने के बाद कोई कैदी जिंदा बच जाए, ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया।

पाइक के कानूनी दल ने तुरंत इस मामले में कोर्ट के समक्ष एक आपातकालीन याचिका दायर की है। वकीलों का कहना है कि सजा की यह प्रक्रिया अत्यंत क्रूर और अमानवीय है, जो अमेरिकी संविधान के नियमों का उल्लंघन करती है। इस घटना के बाद से मौत की सजा देने की इस पूरी व्यवस्था पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बात की गहन जांच की जा रही है कि आखिर दी गई दवा ने अपना असर क्यों नहीं दिखाया और प्रक्रिया में कहां चूक हुई।

शैतानी प्रतीक और खौफनाक हत्याकांड का इतिहास

क्रिस्टी गेल पाइक का इतिहास बेहद खौफनाक रहा है। जब वह महज 18 साल की थीं, तब उन्होंने नॉक्सविले के एक जॉब ट्रेनिंग सेंटर में अपनी सहपाठी 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की बेरहमी से हत्या कर दी थी। पाइक ने अपनी सहेली पर पत्थर और चाकू से बेहद क्रूरतापूर्वक हमला किया था। इस हत्याकांड की चर्चा पूरे अमेरिका में इसलिए भी बहुत अधिक हुई थी क्योंकि इसमें शैतानी प्रतीकों के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, जिसने उस समय सनसनी फैला दी थी।

अदालती सुनवाई के बाद इस मामले में क्रिस्टी गेल पाइक को मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि हत्या के वक्त उनके साथ मौजूद उनके प्रेमी को उम्रकैद की सजा मिली थी। पीड़िता कोलीन स्लेमर की मां पिछले कई दशकों से अपनी बेटी के लिए न्याय की उम्मीद लगाए बैठी थीं। वह इस सजा को अपनी आंखों से देखने और न्याय पूरा होने की आस में खुद जेल परिसर पहुंची थीं, लेकिन उन्हें एक बार फिर इंतजार करना पड़ा।

टेनेसी में इस साल का दूसरा असफल प्रयास

हालांकि पाइक के समर्थक लगातार उनके पक्ष में दलीलें देते रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि अपराध के समय उनकी उम्र काफी कम थी, वे मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं और बचपन में भी उनके साथ काफी दुर्व्यवहार हुआ था। इसके बावजूद विभिन्न अदालतों ने उनकी मौत की सजा को हमेशा बरकरार रखा।

टेनेसी राज्य में पिछले कुछ समय में सजा-ए-मौत की यह दूसरी बड़ी विफलता है। इसी साल मई के महीने में भी एक अन्य कैदी को दी जाने वाली मौत की सजा को अंतिम क्षणों में रद्द करना पड़ा था क्योंकि जेल के डॉक्टर उसकी नस ढूंढने में पूरी तरह नाकाम रहे थे। गौरतलब है कि टेनेसी ने हाल के वर्षों में अपराधियों को मौत की सजा देने के लिए केवल एक ही दवा, पेंटोबार्बिटल के उपयोग की नीति अपनाई है। इस समय क्रिस्टी गेल पाइक अस्पताल में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी और इलाज के अधीन हैं, जबकि पीड़िता का परिवार अब भी न्याय की आस में खड़ा है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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