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14 घंटे पहले
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अमेरिका का नया वीजा बॉन्ड कार्यक्रम
अमेरिका ने अपनी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए 50 देशों के नागरिकों के लिए एक कड़ा नियम पेश किया है। अब इन देशों के लोगों को बिजनेस और टूरिस्ट वीजा (बी1/बी2) प्राप्त करने के लिए 20,000 डॉलर तक का वीजा बॉन्ड जमा करना अनिवार्य होगा। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी की गई इस नई सूची में भारत का नाम शामिल नहीं है, जिससे भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह राहत मिली है। भारतीय यात्रियों को इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पड़ोसी देशों पर असर
अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी की गई इस नई सूची में दक्षिण एशिया के कई देश शामिल किए गए हैं। नियम के मुताबिक, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के नागरिकों को अब अमेरिका जाने के लिए यह बॉन्ड राशि जमा करनी होगी। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन देशों के यात्रियों को यदि बी1/बी2 वीजा के लिए सभी पात्रता मानदंड पूरे करने के बावजूद वीजा दिया जाता है, तो उनसे यह बॉन्ड राशि मांगी जा सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश और नेपाल पर यह नियम 21 जनवरी से प्रभावी है, जबकि भूटान के लिए यह 1 जनवरी से लागू कर दिया गया है। इन देशों के अलावा अफ्रीका, कैरेबियाई क्षेत्र, मध्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र के अन्य देश भी इस सूची का हिस्सा हैं।
बॉन्ड राशि और चयन प्रक्रिया
यह वीजा बॉन्ड कार्यक्रम इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट की धारा 221(जी)(3) के तहत संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के प्रावधानों के अनुसार, आवेदक को अपनी यात्रा के लिए 10,000 डॉलर, 15,000 डॉलर या 20,000 डॉलर की राशि बॉन्ड के रूप में जमा करनी पड़ सकती है। इस राशि का निर्धारण वीजा इंटरव्यू के दौरान कांसुलर अधिकारी द्वारा किया जाता है। अधिकारी स्थिति का आकलन करने के बाद ही तय करते हैं कि आवेदक को कितनी राशि जमा करनी है।
नियम के पीछे का उद्देश्य
इस नई नीति को तीन अगस्त से एक अंतिम नियम के तौर पर लागू किया गया था। अमेरिकी विदेश विभाग का मुख्य उद्देश्य उन मामलों को नियंत्रित करना है, जिनमें लोग बिजनेस या टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका तो जाते हैं, लेकिन वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वहां रुक जाते हैं। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) की ‘एंट्री/एक्जिट ओवरस्टे रिपोर्ट’ का सहारा लिया जाता है। जिन देशों के नागरिकों के वीजा ओवरस्टे के आंकड़े अधिक होते हैं, उन्हें इस बॉन्ड की श्रेणी में डाला जाता है।
बॉन्ड जमा करने की प्रक्रिया
अमेरिकी विदेश विभाग ने आवेदकों को चेतावनी दी है कि वे कांसुलर अधिकारी के स्पष्ट निर्देश मिलने से पहले किसी भी तरह का भुगतान न करें। जब कोई अधिकारी बॉन्ड जमा करने का निर्देश दे, तभी आवेदक को डीएचएस फॉर्म आई-352 भरना होगा। इसके साथ ही, अमेरिकी वित्त विभाग के ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म 'पे डॉट जीओवी' (pay.gov) के माध्यम से बॉन्ड की सभी शर्तों को स्वीकार करना अनिवार्य होगा। यह राशि स्वयं आवेदक या उसकी ओर से कोई भी दोस्त, रिश्तेदार या व्यावसायिक सहयोगी जमा कर सकता है। नियमों का सही ढंग से पालन करने पर बॉन्ड की राशि वापस कर दी जाती है।
यात्रियों के लिए अन्य अनिवार्य शर्तें
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बॉन्ड जमा कर देने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि वीजा मिलने की गारंटी मिल गई है। बॉन्ड जमा करने के बाद भी आवेदकों को अमेरिका आने और वहां से वापस जाने के लिए अतिरिक्त सख्त नियमों का पालन करना होगा। उन्हें यात्रा के लिए केवल कमर्शियल एयरपोर्ट्स का ही उपयोग करना होगा। इसमें वे स्थान शामिल हैं जहां अमेरिकी कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन की प्रीक्लियरेंस सुविधा मौजूद है। इसके अलावा, आवेदक चार्टर विमान, सामान्य विमानन, सड़क मार्ग या समुद्री बंदरगाहों का उपयोग करके यात्रा नहीं कर सकते हैं।
शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करता है या उन पर उल्लंघन का संदेह होता है, तो मामले को यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) को सौंपा जाएगा। यूएससीआईएस यह जांच करेगा कि क्या वाकई में बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा गया है। यदि उल्लंघन साबित होता है, तो आवेदक को दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह पूरा तंत्र वीजा ओवरस्टे को कम करने और अमेरिकी आव्रजन कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है।
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