अमेरिकी ग्रीन कार्ड नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, भारतीयों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें विश्व एक घंटा पहले 4
अमेरिका में पेश किए गए एक नए विधेयक 'अमेरिकन्स फर्स्ट इमिग्रेशन एक्ट' के जरिए ग्रीन कार्ड देने की मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका असर वहां बसने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों पर पड़ सकता है।

ग्रीन कार्ड की मौजूदा व्यवस्था पर संकट

अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का ख्वाब देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करना पहले ही काफी कठिन और लंबी प्रक्रिया है, लेकिन अब एक नए प्रस्तावित विधेयक ने इस राह को और भी मुश्किल बना दिया है। रिपब्लिकन सीनेटर टॉमी टबरविले ने हाल ही में एक नया बिल पेश किया है, जिसका नाम अमेरिकन्स फर्स्ट इमिग्रेशन एक्ट रखा गया है। यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह से बदल जाएगी। इसका सीधा और बड़ा असर उन हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के बैकलॉग में अपनी बारी का लंबा इंतजार कर रहे हैं।

क्या है नया प्रस्तावित पॉइंट्स सिस्टम?

इस बिल के माध्यम से मौजूदा रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों को समाप्त कर एक नई पॉइंट्स आधारित प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, अमेरिका में आने के लिए आवेदकों को विशिष्ट योग्यताएं पूरी करनी होंगी। मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:

  • हर साल दुनिया भर के आवेदकों के लिए 1,92,000 पॉइंट्स-बेस्ड इमिग्रेंट वीजा जारी करने की सीमा तय की जाएगी।
  • आवेदक के पास अमेरिका में एक वैध और पक्की नौकरी का प्रस्ताव होना अनिवार्य होगा।
  • आवेदक की आयु 18 से 51 वर्ष के बीच होनी आवश्यक है।
  • आवेदकों को अंग्रेजी भाषा की दक्षता परीक्षा में पांचवें डेसाइल या उससे अधिक का स्कोर हासिल करना होगा।
  • कुल 16 पॉइंट्स अर्जित करना अनिवार्य होगा, जिसके लिए शिक्षा, वेतन, सैन्य सेवा, अंग्रेजी दक्षता और असाधारण उपलब्धियों के आधार पर अंक दिए जाएंगे।
  • सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस व्यवस्था में वेतन की सीमा भी एक महत्वपूर्ण कारक होगी। जिन आवेदकों के पास अमेरिका की मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है, उन्हें ऐसी नौकरी का ऑफर दिखाना होगा जिसका वेतन उस राज्य के सामान्य मीडियन वेतन से कम से कम 200 प्रतिशत हो। वहीं, अमेरिकी डिग्री धारकों के लिए यह सीमा मीडियन वेतन का 150 प्रतिशत रखी गई है।

लंबित याचिकाओं पर असर

इस बिल के सबसे विवादास्पद पहलुओं में से एक यह है कि इसके लागू होने पर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए पहले से लंबित कई याचिकाएं अमान्य हो सकती हैं। इसका मतलब यह है कि उन आवेदकों के आवेदन खारिज या नामंजूर किए जा सकेंगे, जो अभी तक प्रक्रिया में थे। हालांकि, जिन लोगों की याचिकाएं बिल के प्रभावी होने से पहले ही मंजूर हो चुकी हैं, उन्हें तब तक वीजा मिलने की संभावना रहेगी, जब तक उस वित्त वर्ष का सालाना वीजा कोटा समाप्त नहीं हो जाता। इसके बाद उसी कैटेगरी के तहत कोई और वीजा जारी नहीं किया जाएगा। यह प्रावधान उन भारतीय आवेदकों के लिए बड़ा झटका है, जिनकी याचिकाएं तो स्वीकृत हो चुकी हैं, लेकिन बैकलॉग की वजह से वे अभी भी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।

अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता और शर्तें

सीनेटर टॉमी टबरविले का तर्क है कि अमेरिका की मौजूदा इमिग्रेशन व्यवस्था यह आकलन करने में विफल है कि देश में किन लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है। उनके अनुसार, इसे और अधिक नियंत्रित करने की आवश्यकता है ताकि देश में आने वाला हर व्यक्ति कानून का पालन करे और समाज में योगदान दे। बिल में कंपनियों के लिए भी कड़े नियम प्रस्तावित हैं। अब किसी विदेशी कर्मचारी को नौकरी पर रखने से पहले कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने पहले अमेरिकी नागरिकों को काम पर रखने का प्रयास किया है। यदि कोई अमेरिकी नागरिक विदेशी उम्मीदवार के बराबर या उससे अधिक योग्य है, तो नौकरी उसी को मिलनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, कंपनियां दस्तावेज जमा करने से 90 दिन पहले किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं कर सकेंगी। पॉइंट्स सिस्टम के जरिए मिलने वाला ग्रीन कार्ड शुरुआती दो साल के लिए सशर्त होगा।

डाइवर्सिटी वीजा और अन्य प्रतिबंध

इस विधेयक में डाइवर्सिटी वीजा लॉटरी को पूरी तरह से समाप्त करने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही, परिवार के आधार पर मिलने वाली स्थायी निवास की सुविधा को काफी सीमित कर दिया जाएगा। अब केवल पति, पत्नी और नाबालिग बच्चों को ही इसमें शामिल किया जा सकेगा, जबकि माता-पिता, भाई-बहनों और वयस्क बच्चों के लिए ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के मौजूदा रास्ते पूरी तरह बंद हो जाएंगे। बिल में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी नियमों को सख्त बनाया गया है। इसके अनुसार, जो प्रवासी अमेरिका के स्थायी निवासी नहीं हैं, उन्हें कॉलेजों में उस राज्य के बाहर से आने वाले अमेरिकी छात्रों के बराबर ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क देने होंगे। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले शैक्षणिक संस्थानों को 5 साल तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने की अनुमति नहीं मिलेगी।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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