पाकिस्तान को अमेरिकी सीनेटर अब्दुल एल-सैयद ने दिया बड़ा झटका, मदद पर उठाए तीखे सवाल विश्व 2 घंटे पहले 6
अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर अब्दुल एल-सैयद ने पाकिस्तान सहित कई देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य और आर्थिक सहायता पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि करदाताओं के पैसे का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन में नहीं होना चाहिए।

पाकिस्तान की आर्थिक मदद पर गंभीर सवाल

अमेरिका में पहली बार मुस्लिम सीनेटर के रूप में इतिहास रचने वाले अब्दुल एल-सैयद ने पाकिस्तान के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक मदद पर सीधे तौर पर सवाल उठाए हैं। एल-सैयद का मानना है कि अमेरिका को उन तमाम देशों को दी जाने वाली सहायता पर फिर से विचार करना चाहिए, जिन पर अमेरिकी धन का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप हैं। इस सूची में उन्होंने पाकिस्तान के अलावा मिस्र, जॉर्डन और इजरायल का भी जिक्र किया है, जिससे इस्लामाबाद में चिंता का माहौल पैदा हो गया है।

ऐतिहासिक जीत और विदेश नीति पर रुख

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अब्दुल एल-सैयद ने हाल ही में मिशिगन में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को करारी शिकस्त देकर इतिहास रचा है। वे अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सांसद बन गए हैं। अपनी जीत के तुरंत बाद, उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति और अन्य देशों को दी जाने वाली मदद के संदर्भ में अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी करदाताओं की गाढ़ी कमाई का पैसा ऐसे किसी भी कार्य में खर्च नहीं होना चाहिए जो वैश्विक नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे के बाहर हो।

इंटरव्यू में पाकिस्तान का खास जिक्र

एक प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थान को दिए गए इंटरव्यू के दौरान अब्दुल एल-सैयद ने अपनी बात विस्तार से रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी अपनी नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों पर खरी उतरती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल इजरायल तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम खुद अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति जवाबदेह हैं? यह सिर्फ इजरायल की बात नहीं है। मेरा यही दृष्टिकोण मिस्र को लेकर भी है, जहां से मेरा परिवार मूल रूप से अमेरिका आया था। पाकिस्तान और जॉर्डन के मामलों में भी मेरा रुख बिल्कुल वैसा ही है।’

उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि अमेरिका किसी देश को वित्तीय सहायता प्रदान करता है और वह राष्ट्र उसी पैसे का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों को तोड़ने के लिए करता है, तो जवाबदेही तय करने की शुरुआत वहीं से होनी चाहिए। यह बयान भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह आवाज उठाता रहा है कि पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और सैन्य गतिविधियों में किया जाता है।

इजरायल की सैन्य मदद और ट्रंप की नीति

अब्दुल एल-सैयद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल की सैन्य सहायता कम करने के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि राष्ट्रपति का यह कदम सही दिशा में है। उन्होंने इजरायल को अमेरिकी हथियारों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग भी की है। उनके अनुसार, अमेरिका से मिलने वाले कई हथियारों का उपयोग ऐसे अभियानों में किया गया है, जिन्हें उन्होंने ‘नरसंहार’ और ‘रंगभेद’ जैसी गंभीर शब्दावली से जोड़ा है।

वर्तमान में, अमेरिका एक समझौते के तहत इजरायल को हर साल 3.8 अरब डॉलर की सैन्य मदद मुहैया कराता है। यह समझौता साल 2028 तक प्रभावी रहने वाला है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल के अंत तक इजरायल को मिलने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सालाना सैन्य सहायता को समाप्त करने की योजना का ऐलान किया है। एल-सैयद का मानना है कि अमेरिका को अपनी विदेश नीति में एक समान पैमाना अपनाना चाहिए और यदि मदद दी जा रही है, तो उसकी कड़ी निगरानी होनी चाहिए कि उस पैसे का अंतिम उपयोग क्या हो रहा है।

जवाबदेही और भविष्य की चुनौतियां

पाकिस्तान, मिस्र और जॉर्डन के अलावा अब्दुल एल-सैयद ने सऊदी अरब को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य मदद पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि अमेरिकी करदाताओं के धन का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर की जरूरतों को पूरा करना होना चाहिए। अमेरिका दशकों से पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के देशों को आर्थिक और सैन्य सहायता देता आ रहा है, लेकिन अब एल-सैयद चाहते हैं कि इस मदद को बिना शर्त जारी रखने के बजाय इसे जवाबदेही के साथ जोड़ा जाए। यह नई बहस अमेरिका के उन देशों के साथ रिश्तों को प्रभावित कर सकती है जो अब तक अमेरिकी मदद पर निर्भर रहे हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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