ताबूत में दफन होने वाली थी 15 साल की किशोरी, 8 घंटे बाद अचानक हुई जिंदा, हैरान रह गए परिजन विश्व 6 घंटे पहले 2
ग्वाटेमाला में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां 15 साल की किशोरी को मृत मानकर ताबूत में रखा गया था, लेकिन आठ घंटे बाद उसमें हलचल देखकर सभी के होश उड़ गए।

मातम के बीच अचानक ताबूत में हुई हलचल

10 अक्टूबर की दोपहर का समय था और घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। माहौल पूरी तरह से गमगीन था क्योंकि परिवार के लोग 15 साल की युलेइडी को खो चुके थे। उसे मृत मानकर एक ताबूत में लिटा दिया गया था और अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार अपनी लाड़ली को आखिरी विदाई देने के लिए एकत्र हुए थे। तभी, दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको सकते में डाल दिया। युलेइडी की मां जब आखिरी बार अपनी बेटी को देखने के लिए ताबूत के करीब पहुंची, तो उन्हें उसमें कुछ हरकत महसूस हुई। पहले तो उन्हें लगा कि यह उनका भ्रम है, लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा तो ताबूत के अंदर हलचल हो रही थी। जिस बेटी के लिए कुछ देर पहले तक मातम मनाया जा रहा था, वह चमत्कारिक रूप से जीवित थी।

बीमारी के बाद पिता ने मान लिया था मृत

यह चौंकाने वाली घटना मध्य अमेरिका के ग्वाटेमाला स्थित एल जोकोटे क्षेत्र की है। युलेइडी इक्सकोटोयाक नामक यह किशोरी उस दिन सुबह अचानक बीमार पड़ गई थी। उसने अपने पिता अब्राहम इक्सकोटोयाक डोजिन से शिकायत की थी कि उसे सीने में बहुत तेज दर्द हो रहा है और उसे शरीर काफी भारी महसूस हो रहा है। पिता अपनी बेटी की हालत देखकर घबरा गए और उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए निकले। हालांकि, रास्ते में ही युलेइडी की स्थिति और अधिक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई।

अब्राहम के मुताबिक, जब वे सैन पेड्रो जोकोपिलास इलाके में पहुंचे, तब उन्हें लगा कि उनकी बेटी की सांसें थम चुकी हैं। पिता ने महसूस किया कि उसकी नब्ज भी चलनी बंद हो गई है, जिसके आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाल लिया कि उनकी बेटी की मृत्यु हो गई है। सबसे हैरानी की बात यह रही कि वे बेटी को लेकर अस्पताल के अंदर नहीं गए और न ही किसी चिकित्सक से उसकी जांच करवाई। बिना किसी मेडिकल पुष्टि के पिता ने उसे मृत मान लिया और वापस घर लौट आए।

ताबूत से बाहर आते ही मांगा पानी

घर लौटने तक वहां पड़ोसियों और रिश्तेदारों का तांता लग चुका था। हर कोई युलेइडी के जाने के दुख में डूबा था और उसकी मां लेसविया का रो-रोकर बुरा हाल था। लेसविया जब ताबूत के पास खड़ी होकर अपनी बेटी को निहार रही थीं, तभी उन्हें ताबूत के भीतर हलचल का एहसास हुआ। उनकी नजरें उस पर टिक गईं और उन्होंने देखा कि ढक्कन के नीचे वाकई कुछ हिल रहा है।

बिना देरी किए मां ने तुरंत ताबूत का ढक्कन खोल दिया। वहां मौजूद सभी लोग हक्के-बक्के रह गए, क्योंकि युलेइडी जीवित थी और उसे होश आ चुका था। कुछ ही पलों पहले जो घर आंसुओं से भरा हुआ था, वहां अब खुशी की लहर दौड़ गई। ताबूत से बाहर आते ही युलेइडी ने सबसे पहले पीने के लिए पानी मांगा। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहा है। परिवार वालों के लिए यह किसी पुनर्जन्म जैसा अहसास था।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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