विश्व
एक घंटा पहले
6
विचारों
81 साल बाद फायरिंग स्क्वाड का खौफनाक इस्तेमाल
अमेरिकी सैन्य इतिहास में एक ऐसी घटना होने जा रही है जिसकी कल्पना आधुनिक दौर के किसी भी सैन्य विशेषज्ञ ने नहीं की थी। पेंटागन की सिफारिश और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आधिकारिक मंजूरी के बाद पूर्व मेजर निदाल हसन को मौत की सजा दी जाएगी। यह कोई सामान्य फांसी नहीं होगी, बल्कि उसे फायरिंग स्क्वाड के सामने कुर्सी से बांधकर उसकी छाती पर सीधी गोलियों की बौछार की जाएगी। द्वितीय विश्व युद्ध के समापन के बाद से यानी पिछले 81 वर्षों में यह पहली बार है जब अमेरिकी सेना इतनी कठोर और ऐतिहासिक रूप से पुरानी पद्धति का इस्तेमाल किसी अपराधी को दंड देने के लिए कर रही है।
कौन है निदाल हसन और क्या था उसका जघन्य अपराध
यह पूरा मामला 17 साल पहले 5 नवंबर 2009 की उस काली दोपहर से जुड़ा है, जिसे अमेरिकी सैन्य इतिहास में किसी भी सैन्य ठिकाने पर हुआ अब तक का सबसे घातक हमला माना जाता है। निदाल हसन अमेरिकी सेना में एक मेजर के पद पर तैनात था और उसका मुख्य काम एक मनोचिकित्सक के रूप में अपने साथी सैनिकों के मानसिक तनाव को कम करना था। वह टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर तैनात था, जहां उस दिन सैकड़ों सैनिक इराक और अफगानिस्तान में तैनाती से पहले अपना अंतिम मेडिकल चेकअप और टीकाकरण करा रहे थे।
हसन ने उस दिन अपने कट्टरपंथी विचारों और सिरफिरेपन के कारण निहत्थे सैनिकों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस हमले में 13 बहादुर अमेरिकी सैनिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 32 अन्य जवान गंभीर रूप से घायल होकर तड़पने लगे थे। साल 2013 में जब उसके खिलाफ कोर्ट-मार्शल की कार्यवाही चली, तो हसन ने अपने किए पर जरा भी पछतावा नहीं जताया। उसने अदालत में स्वीकार किया कि वह अफगानिस्तान में तालिबान और मुसलमानों की रक्षा करने के उद्देश्य से अपने ही देश के सैनिकों की जान ले रहा था।
फायरिंग स्क्वाड की प्रक्रिया क्या है
फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने की प्रक्रिया शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से अत्यंत भयावह मानी जाती है। इसमें सबसे पहले दोषी को एक भारी लोहे की कुर्सी पर मजबूती से बांध दिया जाता है। उसके शरीर को चमड़े की पट्टियों से इस तरह जकड़ा जाता है कि वह हिल न सके। इसके बाद उसके सिर पर काला कपड़ा ढका जाता है ताकि उसे कुछ भी दिखाई न दे। एक डॉक्टर की देखरेख में उसकी छाती पर ठीक दिल के ऊपर एक सफेद निशान लगाया जाता है, जो निशानेबाजों के लिए लक्ष्य का काम करता है। लगभग 20 फीट की दूरी पर पांच प्रशिक्षित निशानेबाज अपनी राइफलों के साथ तैनात होते हैं। एक निश्चित संकेत पर वे सभी एक साथ ट्रिगर दबाते हैं, जिससे अपराधी का सीना छलनी हो जाता है और चंद सेकंड में उसकी मौत हो जाती है।
राष्ट्रपति की भूमिका और सैन्य कानून
अमेरिका में 'यूनिफॉर्म कोड ऑफ मिलिट्री जस्टिस' नामक सैन्य कानून लागू है। इस प्रणाली के तहत किसी भी सैनिक को दी गई मौत की सजा तब तक अमल में नहीं लाई जा सकती जब तक कि देश का राष्ट्रपति उस पर लिखित अनुमति न दे दे। 1983 में सशस्त्र बलों की अपील अदालत ने इस तरह की सजाओं को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, लेकिन अगले ही वर्ष 1984 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने एक विशेष एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए इसे पुनः बहाल कर दिया। हालांकि, वर्तमान में फायरिंग स्क्वाड का उपयोग अमेरिका में अत्यंत दुर्लभ है और केवल चुनिंदा राज्यों जैसे साउथ कैरोलिना, इडाहो, ओक्लाहोमा और यूटा तक ही सीमित है। लेकिन सेना में इस पद्धति पर 1945 के बाद से पूरी तरह रोक सी लगी हुई थी, जिसे अब ट्रंप सरकार ने निदाल हसन के लिए पुनः जीवित किया है।
डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख और न्याय की वापसी
इस ऐतिहासिक और कठोर निर्णय के पीछे वॉशिंगटन की बदलती राजनीतिक हवा का बड़ा हाथ है। पूर्ववर्ती जो बाइडन सरकार के दौरान संघीय स्तर पर मौत की सजाओं को लगभग रोक दिया गया था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटते ही उन्होंने पहले दिन ही एक नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया। ट्रंप का स्पष्ट मानना है कि देश के खिलाफ संगीन अपराध करने वालों के मन में डर पैदा करने के लिए मौत की सजा का सख्ती से पालन होना चाहिए। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सिफारिश पर राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना किसी देरी के निदाल हसन के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर दिए।
इंसाफ का आखिरी पड़ाव
3 दिसंबर 2026 की तारीख उस फोर्ट हुड सैन्य अड्डे के लिए न्याय का दिन होगी, जहां कभी खून की होली खेली गई थी। यह केवल एक अपराधी की जिंदगी खत्म होने का मामला नहीं है, बल्कि उन 13 शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए एक लंबे इंतजार का अंत है, जिन्होंने इतने वर्षों तक इंसाफ की राह देखी है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बात की पुष्टि की है। सेना के इस कड़े फैसले ने पूरी दुनिया को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि वर्दी पहनकर गद्दारी करने वाले और अपनों का खून बहाने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। यह सजा उन सभी के लिए एक सबक है जो अमेरिकी सुरक्षा और सैनिकों के साहस को चुनौती देने का दुस्साहस करते हैं।
Comments
0 comment