INS मालवण की एंट्री पर गर्जा मिग-29KUB, वायुसेना प्रमुख ने भरी उड़ान: जानिए इस युद्धपोत की खास बातें राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 60
भारतीय नौसेना में शामिल हुए नए युद्धपोत INS मालवण के जलावतरण समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने मिग-29KUB लड़ाकू विमान से उड़ान भरकर ऐतिहासिक मिसाल पेश की है।

नौसेना की ताकत में हुआ इजाफा

भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री शक्ति और सामरिक क्षमता को एक नई ऊंचाई प्रदान करते हुए INS मालवण को आधिकारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण समारोह की अध्यक्षता भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने की। इस कार्यक्रम का सबसे रोमांचक क्षण तब आया जब वायुसेना प्रमुख ने देश के गौरवशाली और विशाल विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य से उड़ान भरने के लिए MiG-29KUB लड़ाकू विमान का रुख किया और उसमें सवार होकर आसमान की ऊंचाइयों को छुआ।

वायुसेना और नौसेना के बीच गहराता तालमेल

वायुसेना प्रमुख की इस उड़ान ने न केवल दर्शकों को रोमांचित किया, बल्कि यह भारतीय रक्षा बलों के बीच बढ़ते आपसी सामंजस्य का एक जीवंत उदाहरण भी बना। विमानवाहक पोत पर मौजूद रहने के दौरान, उन्होंने जहाज के नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों, अन्य सैन्य अधिकारियों और नौसैनिकों के साथ विस्तृत चर्चा की। हवा और समुद्र के बीच की यह जुगलबंदी इस बात का संकेत है कि भविष्य के किसी भी युद्ध या संकट की स्थिति में वायुसेना और नौसेना किस तरह एक टीम बनकर कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह कदम देश की समुद्री सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा को एक नई मजबूती देने वाला है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत से जुड़ा नाम

इस नए और घातक युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तटीय शहर मालवण के नाम पर रखा गया है। यह नामकरण छत्रपति शिवाजी महाराज की महान समुद्री विरासत और उनके द्वारा निर्मित नौसैनिक शक्ति के प्रति एक सम्मान है। इस समारोह में नौसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर भारत की एक और सफलता

INS मालवण पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस युद्धपोत के निर्माण में 80 प्रतिशत से भी अधिक स्वदेशी उपकरणों और तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसका आधिकारिक प्रतीक चिह्न बाघ नख है, जो चपलता और वीरता का प्रतीक माना जाता है। इसकी टैगलाइन साइलेंट क्लॉज है, जो इसके काम करने के अनोखे तरीके को दर्शाती है। इस जहाज को विशेष रूप से पानी के भीतर छिपे दुश्मनों की पनडुब्बियों पर बिना किसी आहट के घातक हमला करने के लिए तैयार किया गया है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षा पर जोर

समारोह के दौरान वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने दुनिया भर में बढ़ रही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच समुद्री सुरक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह का माहौल आज दुनिया में बना हुआ है, ऐसे में समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा भारत जैसे देश के लिए अत्यंत जरूरी हो गई है। उन्होंने भारतीय नौसेना की निरंतर बढ़ती ताकत और देश के भीतर ही हथियारों के निर्माण के प्रयासों की जमकर सराहना की।

स्वदेशी निर्माण का अनूठा मॉडल

अपने संबोधन में उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि नौसेना जिस प्रकार अपने अधिकारियों को जहाज निर्माण की पूरी प्रक्रिया से सीधे जोड़ती है, उसी कार्यप्रणाली को रक्षा क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के मॉडल को अपनाने से आत्मनिर्भरता की गति में और अधिक तेजी आएगी और देश कम समय में रक्षा उपकरणों के उत्पादन में अग्रणी बनेगा।

दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए काल

INS मालवण का नौसेना में शामिल होना भारत की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर यानी ASW क्षमता को एक बड़ी मजबूती देगा। यह आधुनिक युद्धपोत बड़े आकार के नौसैनिक जहाजों, अन्य पनडुब्बियों और समुद्री विमानों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर काम करने में सक्षम है। इस नए वॉरशिप के आने से भारतीय नौसेना अब किसी भी परिस्थिति में समुद्री सीमाओं और देश के रणनीतिक हितों की रक्षा करने के लिए पहले से कहीं अधिक सतर्क और सक्षम हो गई है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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