असीम वकार ने थामा कांग्रेस का हाथ, AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा पार्टी पर नहीं पड़ेगा कोई असर भारत 16 घंटे पहले 3
एआईएमआईएम नेता असीम वकार के कांग्रेस में शामिल होने पर वारिस पठान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी की मजबूती पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होगा।

पार्टी छोड़ने से नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव

एआईएमआईएम यानी एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने पार्टी के साथी नेता असीम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की घटना को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में हर व्यक्ति को यह पूरा हक है कि वह अपनी राजनीतिक यात्रा और दिशा स्वयं चुने। वारिस पठान ने स्पष्ट किया कि असीम वकार के पार्टी छोड़कर जाने से एआईएमआईएम की सेहत पर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संगठन को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और जमीनी स्तर पर काम कर रहे मेहनती कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है। संगठन अपनी गति से आगे बढ़ता रहेगा और भविष्य में और अधिक तरक्की करेगा। किसी एक व्यक्ति के आने या जाने से पार्टी की विचारधारा और उसकी कार्यशैली पर कोई विपरीत असर नहीं होता है।

बीजेपी की बी-टीम वाले आरोपों पर पलटवार

इस दौरान वारिस पठान ने उन तमाम आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें एआईएमआईएम को बीजेपी की बी-टीम कहा जाता है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से गलत और निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना है और वे इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

गणपति उत्सव और लाउडस्पीकर पर खड़े किए सवाल

वारिस पठान ने गणपति उत्सव के मौके पर रात 12 बजे तक डीजे और लाउडस्पीकर बजाने की मिली विशेष छूट को लेकर भी प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने साफ किया कि उन्हें किसी भी धर्म के त्योहार से कोई निजी विरोध नहीं है, लेकिन वे कानून की समानता पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि अगर गणपति उत्सव के लिए नियमों में ढील दी जा सकती है, तो ऐसी रियायत मुस्लिम त्योहारों के समय क्यों नहीं दी जाती? उन्होंने बताया कि मुस्लिम समुदाय के जुलूस अक्सर रात 10 बजे के बाद नहीं होते और न ही उनमें डीजे का इस्तेमाल होता है। उन्होंने अजान के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय पहले से ही कानून का पालन कर रहा है और अजान की आवाज निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर ही रखी जाती है।

बुर्का और हिजाब पर दिया कड़ा संदेश

बुर्का और हिजाब के मुद्दे पर अपने कड़े तेवर दिखाते हुए वारिस पठान ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं बुर्का पहनती आई हैं, पहन रही हैं और भविष्य में भी इसे पहनना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी महिलाओं को उनका हिजाब या बुर्का उतारने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि भारत का संविधान उन्हें अपनी पसंद के कपड़े पहनने और धार्मिक स्वतंत्रता का पूर्ण अधिकार देता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या बुर्का पहनने वाली महिलाएं स्वतंत्र नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक पहचान और उनके पहनावे को लेकर समाज में किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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