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6 घंटे पहले
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विचारों
सिलचर चुनाव नतीजों पर सियासत
असम में हुए सिलचर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर कांग्रेस की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। खास बात यह है कि यह मतदान पूरी तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से संपन्न हुआ था, जिसे लेकर अक्सर कांग्रेस चुनाव आयोग पर निशाना साधती रही है। इस परिणाम के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा कि पार्टी ईवीएम पर दोष मढ़ती है, लेकिन बैलेट पेपर पर भी उसे जनता का समर्थन नहीं मिल सका है।
हिमंता बिस्वा सरमा का तीखा प्रहार
असम के मुख्यमंत्री ने परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस का तर्क हमेशा ईवीएम की खराबी के इर्द-गिर्द घूमता है, लेकिन सिलचर के नतीजों ने उनकी इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बैलेट पेपर पर तो कांग्रेस और भी बुरी तरह हारी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, ईवीएम को लेकर तो लोग अक्सर संशय में रहते हैं और मशीनों के सामने घबराकर गलती कर देते हैं, लेकिन बैलेट पेपर में तो मतदाता बहुत स्पष्टता से अपना वोट डालता है। सरमा ने कहा कि हकीकत यह है कि जब तक बैलेट पेपर का इस्तेमाल होगा, कांग्रेस की हार का अंतर और भी बढ़ता जाएगा।
धार्मिक अल्पसंख्यक क्षेत्रों में भी कांग्रेस पस्त
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने परिणामों का विश्लेषण करते हुए यह भी रेखांकित किया कि सिलचर में ऐसी 10 सीटें थीं, जिन्हें धार्मिक अल्पसंख्यकों का गढ़ माना जाता है। वहां कांग्रेस के पास जीतने का मजबूत अवसर था, लेकिन वहां भी उन्हें मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। आंकड़ों की बात करें तो कांग्रेस को मात्र 2 सीटों पर जीत हासिल हुई। उन्होंने कहा कि भाजपा और असम गण परिषद का गठबंधन सबसे आगे रहा, उसके बाद निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई और कांग्रेस तीसरे पायदान पर खिसक गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न केवल मशीनों पर बल्कि कागज के पर्चों पर भी हारने वाली पार्टी साबित हो रही है।
चुनाव का आधिकारिक आंकड़ा
सिलचर नगर निगम के कुल 42 वार्डों में से 40 वार्डों के लिए 3 अक्टूबर को वोट डाले गए थे। वार्ड संख्या 9 और 20 पर भाजपा के उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह और भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए थे। चुनाव के अंतिम नतीजों के मुताबिक, भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 32 सीटें अपने नाम कीं। वहीं, असम गण परिषद को 2 सीटों पर सफलता मिली। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी केवल 2 सीटों तक सिमट गई, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 6 सीटें गईं। इस चुनाव में कांग्रेस की स्थिति काफी कमजोर रही और वह मुख्य मुकाबले से बाहर नजर आई।
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