उपनाम: तर्पण
पितृपक्ष विशेष: संतान प्राप्ति में बाधाओं को दूर करने के लिए करें पंचबली, जानें तर्पण की सही विधि
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिषी के अनुसार, यदि किसी परिवार को संतान सुख में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो पंचबली और तर्पण के विशेष उपाय वंशवृद्धि के मार्ग को प्रशस्त कर सकते हैं।
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान में क्या अंतर है? आचार्य से समझें इन धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं, लेकिन कई लोग इनके बीच के सूक्ष्म अंतर को लेकर उलझन में रहते हैं। खरगोन के विद्वान पंडित जगदीश ठक्कर ने इन तीनों प्रक्रियाओं की विधि और महत्व को विस्...
पितृ पक्ष विशेष: हरिद्वार का कुशावर्त घाट है बेहद खास, जुड़ी हैं भगवान राम और दत्तात्रेय से जुड़ी पौराणिक कथाएं
पितृ पक्ष के दौरान हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। हर की पौड़ी के अलावा कुशावर्त घाट का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा माना गया है।
पितृपक्ष में नवमी और अमावस्या का विशेष महत्व, जानें क्यों हैं ये तिथियां सबसे खास
पितृपक्ष के दौरान नवमी और अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। जानें कि इन दिनों में पूर्वजों के लिए किए गए श्राद्ध और तर्पण से कैसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पितृ पक्ष: हरिद्वार के इन पवित्र घाटों पर पिंडदान से मिलती है पितरों को मुक्ति
पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को समर्पित तर्पण और पिंडदान के लिए हरिद्वार में कई महत्वपूर्ण घाट हैं। इन स्थानों का पौराणिक ग्रंथों में विशेष उल्लेख मिलता है और इनका महत्व सामान्य घाटों से अधिक माना गया है।
भाद्रपद अमावस्या 2026: 11 सितंबर को पितरों की शांति के लिए अपनाएं ये 5 विशेष उपाय
सनातन धर्म में भाद्रपद अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। 11 सितंबर 2026 को आने वाली इस तिथि पर पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुछ धार्मिक कार्य अवश्य करने चाहिए।
क्या आपके पितृ हैं रुष्ट? नाराज पितरों को मनाने का सुनहरा अवसर, इस दिन करें पिंडदान
सोमवती अमावस्या से ठीक एक दिन पहले 14 जून को पितृ कार्येषु अमावस्या पड़ रही है, जिसे नाराज पितरों को प्रसन्न करने और पितृ दोष की शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि बताया गया है।
तीन वर्ष बाद बना दुर्लभ योग, अधिकमास के संग पूर्ण होगा पुरुषोत्तम मास, एक छोटा उपाय बदल सकता है भाग्य
तीन साल बाद ऐसा संयोग बना है जब अधिकमास की सोमवती अमावस्या के साथ पुरुषोत्तम मास का समापन हो रहा है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण, दान और शिव पूजा से पितृ दोष कम होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
तीन वर्ष बाद अधिकमास में बना सोमवती अमावस्या का दुर्लभ योग, एक उपाय से दूर होगा पितृ दोष और मिलेगा पुण्य फल
इस बार पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो करीब तीन साल में एक बार आता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का तर्पण, दान और भगवान शिव की पूजा करने से पितृ दोष में राहत और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।