उपनाम: जीवामृत
साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई के बाद खेती में उतरे नरेंद्र, केंचुआ खाद से बना डाला कामयाब कारोबार
सतना के इटौरा गांव के 25 वर्षीय नरेंद्र कुमार कुशवाहा ने साइबर सिक्योरिटी में ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के बजाय केंचुआ खाद उत्पादन को व्यवसाय बनाया और अब किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
रासायनिक खाद और कीटनाशक को कहा अलविदा, इस किसान के ऑर्गेनिक बैंगन बने लोगों की पहली पसंद
मुरादाबाद के किसान ओमप्रकाश सिंह वर्मी कंपोस्ट, जीवामृत और केंचुआ खाद की मदद से जहरमुक्त बैंगन उगा रहे हैं और इन्हें पड़ोसियों को मुफ्त बांटकर प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं।
पहाड़ी खेती का असली साथी है गोबर की खाद! न यूरिया की जरूरत, न DAP की — सालों तक मिलता है फायदा
उत्तराखंड के ढलानदार और सीढ़ीदार खेतों में पैदावार बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता कायम रखने में पशुओं का गोबर सबसे कारगर साबित हो रहा है। यह प्राकृतिक खाद मिट्टी का कटाव रोकने के साथ-साथ कम लागत में बेहतर मुनाफे का रास्ता भी खोलती है।
सिरोही में जैविक अंजीर की खेती बनी किसानों की आमदनी का जरिया, कम पानी में मिल रहा भरपूर उत्पादन
अरावली की तलहटी में बसे सिरोही के आमथला गांव के तपोवन में करीब दो बीघा जमीन पर जैविक तरीके से अंजीर उगाई जा रही है। कम पानी, कम लागत और लगातार बनी रहने वाली मांग के चलते यह फसल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।