उपनाम: बांस शिल्प
प्लास्टिक के दौर में भी नहीं टूटी बांसफोड़ परिवारों की जिद, कोडरमा में हुनर से जिंदा रखी है पुश्तैनी परंपरा
कोडरमा में बांसफोड़ समुदाय के 30 से 40 परिवार प्लास्टिक की बढ़ती चुनौतियों के बावजूद अपनी पारंपरिक कला को जिंदा रखे हुए हैं। बेहद कम कमाई होने के बावजूद ये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ीगत हुनर के जरिए पर्यावरण के अनुकूल बांस के सामान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं।
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3 घंटे पहले