घर खरीदारों (होमबायर्स) के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने बुधवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पांच अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई फ्लैट खरीदारों से कथित तौर पर की गई ठगी और 'सबवेंशन स्कीम' के नाम पर हुए धोखे से जुड़े तीन मामलों में की गई है।
मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज मामलों के आधार पर की जा रही है। जांच एजेंसी के निशाने पर तीन बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां हैं। इनमें सीएचडी डेवलपर्स लिमिटेड, नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड और मंजू जे होम्स (इंडिया) लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं, जिसके बाद ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है।
'कब्जा मिलने तक कोई ईएमआई नहीं' का झांसा
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई 3 प्राथमिकियों (FIR) के बाद हुई थी। सीबीआई की शुरुआती जांच में यह सामने आया कि इन बिल्डर कंपनियों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए 'नो ईएमआई टिल पजेशन' (कब्जा मिलने तक कोई ईएमआई नहीं) जैसी आकर्षक सबवेंशन स्कीमों का जाल बुना था।
इस झांसे में आकर बड़ी संख्या में होमबायर्स ने फ्लैट बुक किए और बैंकों से भारी-भरकम होम लोन ले लिए। इसके बाद, लोन की राशि सीधे बिल्डरों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई। कई साल बीत जाने के बाद भी खरीदारों को उनके फ्लैट का कब्जा नहीं मिल सका, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
लोन के पैसों का दूसरे कामों में इस्तेमाल
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि होमबायर्स के नाम पर बैंकों से जो होम लोन और अन्य भुगतान प्राप्त हुए थे, उनका इस्तेमाल संबंधित परियोजनाओं को पूरा करने में नहीं किया गया। इसके बजाय, बिल्डर कंपनियों ने इस पैसे को दूसरे प्रोजेक्ट्स में लगा दिया या फिर अन्य व्यक्तिगत और व्यावसायिक कामों में डायवर्ट कर दिया।
इस वित्तीय हेरफेर के कारण परियोजनाओं का काम बीच में ही लटक गया और खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्हें फ्लैट भी नहीं मिला और वे बैंकों का कर्ज चुकाने को भी मजबूर हो गए।
छापेमारी में महत्वपूर्ण सबूत मिलने की उम्मीद
ED के अधिकारियों के मुताबिक, इस छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, बैंक लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए जा रहे हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच की जाएगी ताकि यह साफ हो सके कि होमबायर्स से जुटाया गया पैसा किन-किन बैंक खातों में भेजा गया था।
जांच एजेंसी इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस बड़े घोटाले में बिल्डर कंपनियों के अलावा और कौन-कौन से लोग या बाहरी संस्थाएं शामिल थीं। ईडी का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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