खेती में सही खाद का महत्व
सफल खेती का सबसे बड़ा आधार मिट्टी की सेहत और पौधों की उचित वृद्धि है। इसके लिए फसलों को सही पोषण मिलना अत्यंत आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि किसान अपनी मिट्टी की जांच के आधार पर और फसल की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप खाद का चयन करें, तो पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। वर्तमान में खरीफ का सीजन चल रहा है और किसान धान की रोपाई के लिए कमर कस चुके हैं। कई बार बाजार में डीएपी खाद की कमी की स्थिति बन जाती है, जिससे किसान चिंतित हो जाते हैं। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बाजार में डीएपी के कई प्रभावी विकल्प मौजूद हैं जिनका उपयोग कर किसान बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
टीएसपी है डीएपी का बेहतरीन विकल्प
कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ डीएपी की अनुपलब्धता में टीएसपी यानी ट्रिपल सुपर फास्फेट के उपयोग की सलाह देते हैं। टीएसपी की विशेषताओं को विस्तार से समझें तो इसमें लगभग 48 प्रतिशत फास्फोरस और 15 प्रतिशत कैल्शियम पाया जाता है। यह उन खेतों के लिए बेहद कारगर है जहां मिट्टी में फास्फोरस की भारी कमी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि टीएसपी में नाइट्रोजन नहीं होती है। ऐसे में यदि पौधों की विकास दर धीमी है और उन्हें फास्फोरस के साथ नाइट्रोजन की भी आवश्यकता है, तो किसान इसका उपयोग खाद के संतुलन के साथ कर सकते हैं।
कैल्शियम के फायदे और संतुलित पोषण
गया जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार के अनुसार, डीएपी की तुलना में टीएसपी का एक बड़ा लाभ इसमें मौजूद कैल्शियम है। डीएपी में कैल्शियम का अभाव होता है, जबकि टीएसपी में मौजूद 15 प्रतिशत कैल्शियम पौधों के मजबूत विकास के लिए एक आवश्यक तत्व के रूप में कार्य करता है। कैल्शियम का उपयोग करने से फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और उन पर कीटों व बीमारियों का हमला भी कम होता है। इसके अलावा, यदि फसल को संतुलित पोषण देना हो, तो एनपीके मिश्रित खादों का उपयोग भी एक उत्तम विकल्प माना जाता है।
बेहतर नतीजों के लिए खाद का सही उपयोग
टीएसपी का इस्तेमाल पौधों की जड़ों के विकास, फूलों के आने और फलों की वृद्धि में काफी मददगार साबित होता है। यदि किसान डीएपी के स्थान पर एक बोरी टीएसपी के साथ बीस किलो यूरिया को मिलाकर प्रयोग करें, तो इसके परिणाम डीएपी से भी बेहतर देखे जा सकते हैं। आमतौर पर बिहार के कई इलाकों में किसान धान की रोपाई के एक सप्ताह बाद खाद का प्रयोग करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि टीएसपी या डीएपी का उपयोग खेत की अंतिम जुताई के समय करना अधिक लाभदायक होता है। जिले में सभी प्रकार की खादों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया गया है, जिससे किसानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
- मिट्टी की जांच के बाद ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
- फास्फोरस की पूर्ति के लिए टीएसपी या एसएसपी का उपयोग करें।
- कीटों से बचाव के लिए टीएसपी में मौजूद कैल्शियम फायदेमंद है।
- बेहतर ग्रोथ के लिए टीएसपी के साथ यूरिया का संतुलन बनाएं।
- खाद डालने का सबसे उपयुक्त समय खेत की जुताई के दौरान होता है।
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