मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति पर घमासान, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद जाएंगे सुप्रीम कोर्ट, सड़कों पर उतरे मुस्लिम संगठन

मध्य प्रदेश में नए वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 के तहत बोर्ड के पुनर्गठन में हिंदू सदस्यों को शामिल करने पर विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए कानूनी लड़ाई की चेतावनी दी है।

मध्य प्रदेश में नए वक्फ कानून को लेकर सियासी और सामाजिक बवाल खड़ा हो गया है। राज्य की मोहन सरकार ने एक ऐतिहासिक लेकिन बेहद संवेदनशील कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। इस नए पुनर्गठन की सबसे खास बात यह है कि इसमें गैर-मुस्लिम यानी हिंदू सदस्यों को भी जगह दी गई है। नए वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 के प्रावधानों को लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब मुस्लिम समाज और विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है।

राजपत्र में अधिसूचना जारी, इन सदस्यों को मिली जगह

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद राज्य के प्रशासन द्वारा 4 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश राजपत्र में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई। इस अधिसूचना के अनुसार, बोर्ड में जिन हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है, उनमें इंदौर के रहने वाले मनोज मालपानी और गुना जिले के राघौगढ़ से आने वाले अनिमेश भार्गव का नाम शामिल है। इन दोनों गैर-मुस्लिमों को बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया है, जिसका अब चौतरफा विरोध हो रहा है। मुस्लिम समाज का मानना है कि यह उनकी धार्मिक व्यवस्था में सीधा हस्तक्षेप है।

भोपाल के बुधवारा चौराहे पर प्रदर्शन, फैसले को वापस लेने की मांग

सरकार की इस अधिसूचना के सामने आते ही विरोध के सुर तेज हो गए हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक बुधवारा चौराहे पर विभिन्न मुस्लिम संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताई और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वक्फ एक पूरी तरह से धार्मिक और सामाजिक संस्था है। लोग अपनी निजी संपत्तियां अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए वक्फ को दान करते हैं। ऐसे में इस धार्मिक संस्था के प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों या हिंदुओं का कोई काम नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के इस कदम से पूरे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

विधायक आरिफ मसूद का तीखा हमला, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ विधायक आरिफ मसूद ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह सरकार के इस एकतरफा फैसले को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। आरिफ मसूद ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वक्फ संशोधन का पूरा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और इस पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है, तो फिर मध्य प्रदेश सरकार ने इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई? उन्होंने पूछा कि जब संशोधन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तो दो की जगह तीन गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में कैसे शामिल कर लिया गया?

विधायक मसूद ने वक्फ बोर्ड की तुलना एक धार्मिक ट्रस्ट से करते हुए सरकार की सद्भावना पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को सरकार की ऐसी सद्भावना नहीं चाहिए। उन्होंने राम मंदिर का उदाहरण देते हुए एक बड़ा सवाल दागा और कहा कि वक्फ बोर्ड भी एक तरह का ट्रस्ट है, अगर इसी तरह राम मंदिर ट्रस्ट में किसी मुस्लिम सदस्य को शामिल किया जाता, तो क्या होता? मसूद ने स्पष्ट किया कि इस फैसले के खिलाफ हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।

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