भरत तिवारी मौत मामला: बिहार मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख, राज्य सरकार को अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश

भोजपुर में भरत तिवारी की मौत के मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने इस काम के लिए सरकार को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलौटी गांव में 17 जून को एक बड़ी घटना हुई थी। इस दिन युवा भरत तिवारी की कथित एनकाउंटर में मौत हो गई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। इस घटना ने बिहार की राजनीति के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी काफी हलचल पैदा कर दी थी। लोगों के बढ़ते आक्रोश और परिवार की मांग को देखते हुए स्थिति काफी गंभीर हो गई थी।

न्यायिक जांच का गठन

जनता के भारी विरोध और दबाव को देखते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया था। इसी दिशा में कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने घटना की स्वतंत्र जांच के लिए पटना हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया था, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मानवाधिकार आयोग का बड़ा निर्देश

अब इस मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पीड़ित परिवार को आर्थिक राहत पहुँचाने के उद्देश्य से आयोग ने राज्य सरकार के नाम एक अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए। इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए बिहार सरकार को दो सप्ताह की मोहलत दी गई है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस तय समय सीमा के भीतर आयोग के निर्देशों का पालन किस प्रकार करती है।

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