सूखे की आहट का संकेत देता है जामुन का पेड़, जानिए क्या है 'स्ट्रेस फ्रूटिंग' का पूरा विज्ञान

जामुन के पेड़ों पर अचानक बड़ी संख्या में फल लगना क्या किसी बड़े प्राकृतिक संकट का संकेत है? विशेषज्ञों ने बताया कि इसे वैज्ञानिक भाषा में स्ट्रेस फ्रूटिंग कहा जाता है और यह पेड़ों के अस्तित्व को बचाने का एक अनोखा तरीका है।

प्रकृति का अनोखा संकेत और जामुन का पेड़

अक्सर हमारे घरों में बड़े-बुजुर्गों को यह कहते सुना जाता है कि अगर किसी साल जामुन के पेड़ पर उम्मीद से ज्यादा फल लगें, तो समझ लीजिए कि उस साल बारिश कम होगी या सूखा पड़ने की संभावना है। यह बात सुनने में भले ही कोई लोक मान्यता लगे, लेकिन इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक आधार छिपा है। सागर के शासकीय कन्या महाविद्यालय की बॉटनी विशेषज्ञ प्रोफेसर एम.के. मिश्रा का कहना है कि बुजुर्गों का यह अनुभव पूरी तरह गलत नहीं है। जब प्रकृति में कोई बड़ा बदलाव आने वाला होता है, तो पेड़-पौधे अपने व्यवहार में बदलाव लाकर संकेत देना शुरू कर देते हैं।

क्या होती है स्ट्रेस फ्रूटिंग की प्रक्रिया

विज्ञान की भाषा में इसे स्ट्रेस फ्रूटिंग कहा जाता है। प्रोफेसर एम.के. मिश्रा बताती हैं कि जब किसी फलदार वृक्ष को यह महसूस होता है कि उसके सामने विपरीत परिस्थितियां आने वाली हैं, जैसे कि पानी की कमी या भयंकर गर्मी, तो वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक डिफेंस मोड यानी सुरक्षा चक्र में चला जाता है। पेड़ को जब अपने जीवन पर खतरा महसूस होता है, तो वह अपनी बची हुई ऊर्जा को अपनी अगली पीढ़ी यानी बीजों के विस्तार में लगाने का फैसला करता है। इस दौरान पेड़ का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि वह अधिक से अधिक फल पैदा करे ताकि बीज दूर-दूर तक फैल सकें और उसकी प्रजाति का नामो-निशान पृथ्वी से न मिटे।

आत्मबलिदान या अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद

माइक्रोबायोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर भूपेंद्र अहिरवार इसे आत्मबलिदान जैसा मानते हैं। उनके अनुसार, इसे पेड़ों का खुदकुशी करना नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी को बचाने का एक साहसी कदम कहना ज्यादा सही होगा। जामुन के पेड़ की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं। जब जमीन के नीचे जलस्तर खतरनाक स्तर तक गिर जाता है, तो जड़ों को पानी की कमी के कारण तनाव महसूस होने लगता है। पेड़ इस जल संकट को भांप लेते हैं और इसे आने वाले सूखे या भीषण गर्मी के शुरुआती संकेत के रूप में स्वीकार कर लेते हैं।

पेड़ों के व्यवहार में आता है बदलाव

जब जामुन का पेड़ स्ट्रेस फ्रूटिंग के दौर से गुजर रहा होता है, तो उसके शारीरिक विकास में स्पष्ट बदलाव देखे जा सकते हैं। इस दौरान पेड़ अपनी नई पत्तियां और नई टहनियों का विकास करना पूरी तरह बंद कर देता है। इसका कारण बहुत सरल है, नई पत्तियों और टहनियों को जीवित रखने के लिए पेड़ को काफी अधिक पानी और पोषण की आवश्यकता होती है। चूंकि पेड़ को पता होता है कि आने वाले समय में पानी की कमी होने वाली है, इसलिए वह अपनी सारी ऊर्जा और पोषक तत्वों को बचाकर केवल फलों के उत्पादन पर लगा देता है। यही कारण है कि जिन वर्षों में सामान्यतः फल कम होते हैं, उन वर्षों में भी पेड़ अचानक फलों से लद जाते हैं।

प्राकृतिक संकेतों को समझने की क्षमता

यह स्पष्ट है कि मौसम का पूर्वानुमान लगाने में केवल इंसान या जीव-जंतु ही सक्षम नहीं हैं, बल्कि पेड़-पौधे भी इसमें बहुत आगे हैं। भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं या सूखे जैसे संकटों को इंसान अपनी तकनीक से भले ही बाद में जान पाए, लेकिन प्रकृति का हर एक हिस्सा इसे बहुत पहले ही समझ जाता है। हमारे बुजुर्गों ने अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी की समझ और अनुभव से इन प्राकृतिक संकेतों को देखा और समझा है। पेड़ों के इस मौन व्यवहार को समझना यह साबित करता है कि प्रकृति हमारे साथ निरंतर संवाद करती रहती है, बस हमें उस भाषा को पहचानने की आवश्यकता है।

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