खाटूश्याम जी में मेला संपन्न होने के बाद भी उमड़ रहा आस्था का सैलाब, तीन दिनों में 3.25 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन

सीकर के प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में निर्जला एकादशी मेले के दौरान रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ी, जिसे देखते हुए मंदिर कमेटी ने वीकेंड पर दर्शन के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्याम जी में आस्था का अनोखा सैलाब देखने को मिल रहा है। 'हारे के सहारे' कहे जाने वाले बाबा श्याम का निर्जला एकादशी और द्वादशी का मुख्य मेला भले ही समाप्त हो चुका है, लेकिन भक्तों का उत्साह और श्रद्धा बिल्कुल भी कम नहीं हुई है। मेले के समापन के बाद भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। स्थिति यह है कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर कमेटी को विशेष इंतजाम करने पड़े हैं। अत्यधिक भीड़ के कारण लगातार दो दिनों तक मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे खुले रखे गए और भक्तों की सभी 14 कतारें पूरी तरह से भरी नजर आईं।

तीन दिनों में सवा तीन लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा मेले के दौरान दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए हैं। मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह ने बताया कि मेले के प्रमुख तीन दिनों में कुल 3,25,610 श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में पहुंचकर शीश नवाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। यदि तारीखों और तिथियों के अनुसार आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • दशमी तिथि को कुल 94,558 भक्तों ने बाबा के दर्शन किए।
  • निर्जला एकादशी के मुख्य दिन सबसे अधिक 1,63,052 श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
  • द्वादशी तिथि को 68,000 भक्तों ने बाबा श्याम के चौखट पर मत्था टेका।

द्वादशी के विशेष अवसर पर भक्तों ने मंदिर में कई धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न किए। बड़ी संख्या में परिवारों ने अपने बच्चों के मुंडन संस्कार यानी जडूले उतरवाए और नवविवाहित जोड़ों ने सुखी जीवन के लिए गठजोड़े की जात दी। इस दौरान भक्तों ने बाबा श्याम को खीर-चूरमे का विशेष भोग लगाया और पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री श्याम' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा।

आम और विभिन्न प्रजातियों के फूलों से सजा दरबार

मेले के दौरान बाबा श्याम का दरबार बेहद अलौकिक और मनमोहक नजर आ रहा था। निर्जला एकादशी के पहले दिन बाबा श्याम का विशेष रूप से गुलाब के ताजे फूलों से श्रृंगार किया गया, साथ ही उन्हें सूखे मेवों से तैयार की गई एक विशेष माला भी पहनाई गई। इसके अगले दिन यानी द्वादशी को एक बहुत ही अनोखा श्रृंगार देखने को मिला, जिसमें फूलों के स्थान पर पेड़ों की हरी-भरी पत्तियों का उपयोग करके बाबा को सजाया गया।

इसके अलावा, मुख्य मंडप की सजावट के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए थे। बाबा श्याम के दरबार को करीब 6.30 क्विंटल आम और देश-विदेश से मंगाए गए रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। इस भव्य सजावट में मोगरा, गुलाब, इंग्लिश फ्लॉवर, नारंगी व बसंती गेंदा और जिप्सो सहित लगभग दो दर्जन अलग-अलग किस्मों के फूलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरा परिसर महक उठा।

वीकेंड पर दोपहर में बंद नहीं होगा मंदिर

मेला खत्म होने के बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। शनिवार और रविवार को वीकेंड होने के कारण देश के अलग-अलग राज्यों से भक्तों का खाटूधाम आना लगातार जारी है। भक्तों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए श्री श्याम मंदिर कमेटी ने एक बड़ा निर्णय लिया है।

कमेटी के अनुसार, शनिवार और रविवार को भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों को आसानी से दर्शन कराने के लिए दोपहर 2 बजे से लेकर 4 बजे तक मंदिर के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे। इन दो दिनों में मंदिर दोपहर में भी लगातार खुला रहेगा ताकि भक्तों को कतारों में अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े। हालांकि, सोमवार से जब वीकेंड का दबाव कम होगा, तब मंदिर पूर्व की भांति अपने निर्धारित समय के अनुसार दोपहर में बंद किया जाएगा।

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