भोजपुर के किसान की नई पहल, प्रो-ट्रे तकनीक से पौधों की खेती कर कमा रहे हैं लाखों का मुनाफा

बिहार के भोजपुर में एक किसान आधुनिक प्रो-ट्रे तकनीक का इस्तेमाल कर महज 21 दिनों में सब्जियां तैयार कर रहे हैं, जिसकी मांग बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैली है।

खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर कमा रहे मुनाफा

क्या आपने कभी यह सोचा है कि महज 21 दिनों में पौधों को तैयार करके लाखों रुपये की कमाई संभव है? भोजपुर जिले के एक प्रगतिशील किसान आशुतोष पांडेय ने इस विचार को हकीकत में बदल दिया है। उन्होंने खेती की पारंपरिक विधियों को पीछे छोड़ते हुए प्रो-ट्रे तकनीक को अपनाया है, जिससे न केवल उनका काम आसान हुआ है, बल्कि मुनाफे के नए रास्ते भी खुल गए हैं। उनकी नर्सरी में तैयार किए गए पौधों की मांग अब केवल बिहार के स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल सहित देश के कई अन्य राज्यों से भी भारी मात्रा में ऑर्डर मिल रहे हैं।

क्या है प्रो-ट्रे तकनीक

खेती की दुनिया में प्रो-ट्रे तकनीक एक गेम चेंजर साबित हो रही है। इस प्रक्रिया में पॉलीहाउस और शेडनेट के भीतर पौधों को नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पौधों को विकसित होने में बहुत कम समय लगता है। किसान आशुतोष बताते हैं कि इस विधि से तैयार पौधे न केवल मजबूत और स्वस्थ होते हैं, बल्कि उनमें रोगों और कीटों का प्रकोप भी काफी कम हो जाता है। यही कारण है कि किसान अब पारंपरिक तरीके की जगह इस आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता दे रहे हैं।

समय की बचत और बाजार में बढ़त

इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को नर्सरी की देखभाल करने, बार-बार सिंचाई करने और बीज के खराब होने की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है। आशुतोष के अनुसार, प्रो-ट्रे में तैयार पौधों को किसान सीधे अपने खेतों में लगा सकते हैं, जिससे उनकी फसल लगभग एक महीने पहले तैयार हो जाती है। जल्दी फसल तैयार होने का सीधा लाभ किसानों को बाजार में मिलता है, क्योंकि वे समय से पहले अपनी उपज को अच्छी कीमतों पर बेच पाते हैं।

विभिन्न सब्जियों की नर्सरी का उत्पादन

इस नर्सरी में केवल एक या दो प्रकार की सब्जियां नहीं, बल्कि कई प्रकार की फसलों के पौधे तैयार किए जाते हैं। यहाँ टमाटर, मिर्च, बैंगन, पत्ता गोभी, खीरा, करैला और नेनुआ जैसे प्रमुख सब्जियों के स्वस्थ पौधे तैयार किए जा रहे हैं। आशुतोष ने अपनी यात्रा बहुत छोटे स्तर से शुरू की थी, लेकिन अपनी मेहनत और तकनीक के सही तालमेल से आज वे इसे बड़े स्तर पर संचालित कर रहे हैं। बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ अब अन्य राज्यों के किसान भी उनकी नर्सरी से पौधे मंगवा रहे हैं।

खेती बन रही है एक मुनाफे वाला व्यवसाय

प्रो-ट्रे तकनीक ने यह साबित कर दिया है कि कम लागत, कम जगह और कम समय में भी खेती के माध्यम से बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। भोजपुर का यह किसान न केवल स्वयं एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हुआ है, बल्कि अन्य हजारों किसानों को भी आधुनिक खेती के प्रति प्रेरित कर रहा है। यदि इसी तरह से किसान नई वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना जारी रखते हैं, तो खेती आने वाले समय में सिर्फ गुजारा करने का साधन न रहकर एक बेहतरीन और आकर्षक कारोबार का माध्यम बन जाएगी।

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