रांची की महिलाओं ने बनाया पशुओं के लिए खास 'मिक्स ऑयल', घर की रसोई की सामग्री से तैयार हुआ रामबाण

झारखंड की राजधानी रांची की महिलाओं ने एक अनोखा देसी तेल तैयार किया है जो गाय, भैंस और बकरियों के स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अजवाइन, लहसुन और सरसों के तेल से बना यह मिश्रण पशुओं की कई बीमारियों में बेहद असरदार साबित हो रहा है।

पशुपालन में मददगार बना अनोखा देसी नुस्खा

झारखंड की राजधानी रांची के अंगढा गांव में रहने वाली महिलाओं ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया है, जो पशुपालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इन महिलाओं ने अपने प्रयासों से एक विशेष 'मिक्स ऑयल' तैयार किया है, जो पशुओं की सेहत के लिए रामबाण माना जा रहा है। इस तेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसे घर में मौजूद रसोई की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है। ग्रामीण महिलाएं अब इस उत्पाद को न केवल खुद बना रही हैं, बल्कि इसे बाजार तक भी पहुंचा रही हैं।

तेल बनाने की विधि और सामग्री

इस तेल को तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए अलबेला एक्का बताती हैं कि इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से सरसों के तेल का उपयोग आधार के रूप में किया जाता है, जिसमें विटामिन ए, बी, सी, फोलिक एसिड और कई महत्वपूर्ण मिनरल्स प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं।

इस तेल को बनाने का तरीका काफी खास है:

  • सबसे पहले शुद्ध सरसों का तेल लिया जाता है।
  • इसमें अजवाइन, मंगरेला, लहसुन और ताजी तुलसी की पत्तियां मिलाई जाती हैं।
  • मिश्रण को आग पर धीमी आंच में तब तक पकाया जाता है जब तक कि 1 लीटर तेल घटकर आधा लीटर न रह जाए।

इस प्रक्रिया के माध्यम से सामग्री के सभी पोषक तत्व तेल में अच्छी तरह समाहित हो जाते हैं।

किन बीमारियों में है फायदेमंद

यह मिक्स ऑयल पशुओं के शरीर में होने वाली सूजन, खुजली, चेचक, बुखार और अन्य प्रकार के त्वचा संबंधी रोगों के इलाज में बेहद प्रभावी है। यह एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। यदि आप घर में गाय, भैंस, बकरी या यहां तक कि मुर्गी भी पालते हैं, तो उन्हें रोजाना खाने में केवल एक चम्मच यह तेल देने से उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। गांव के लोगों का मानना है कि यह दवा पशुओं के लिए किसी जादुई उपचार से कम नहीं है।

सरकारी सहयोग और बाजार में उपलब्धता

इस पहल को सरकारी स्तर पर भी मान्यता और प्रोत्साहन मिल रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से इन महिलाओं को उत्पाद की पैकेजिंग और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आज यह उत्पाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडियामार्ट और पलाश स्मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी बिक्री की जा रही है।

अलबेला एक्का के अनुसार, इस तेल की मांग लगातार बढ़ रही है और उन्हें हर दिन बड़े पैमाने पर बल्क ऑर्डर मिल रहे हैं। यह सफलता न केवल पशुओं के इलाज में एक नई दिशा दिखा रही है, बल्कि गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत माध्यम भी बन गई है। यदि आप चाहें तो इसे शुद्ध तरीके से अपने घर पर भी तैयार कर सकते हैं, क्योंकि इसमें उपयोग होने वाली सामग्री आसानी से हर रसोई में मिल जाती है।

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