अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी पर फूटा पहले महादानी का गुस्सा, कहा- पाप का फल तो भगवान राम ही देंगे

राम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये दान करने वाले सियाराम उमरवैश्य ने चंदे में हुई कथित चोरी पर गहरा दुख जताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

राम मंदिर के दान पर उठे सवाल

अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से करोड़ों लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया है। इस पवित्र कार्य में सहयोग करने वाले कई दानदाताओं ने अपनी जीवनभर की कमाई अर्पित कर दी थी। हालांकि, हाल ही में राम मंदिर के चंदे में चोरी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस घटना से उन लोगों को गहरा धक्का लगा है, जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। राम मंदिर के लिए 1 करोड़ रुपये की धनराशि दान करने वाले प्रतापगढ़ के निवासी सियाराम उमरवैश्य ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

कानून और ईश्वर की अदालत

सियाराम उमरवैश्य ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी लोग राम मंदिर के चंदे के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उन्हें अपने किए का परिणाम भुगतना ही होगा। उन्होंने सजा को दो स्तरों पर विभाजित किया। पहली सजा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश का कानून अपना काम कर रहा है और प्रशासन मामले की तह तक जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रशासन हर एक दोषी को ढूंढ निकालेगा। दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि जिसने भी यह पाप किया है, उसे ईश्वर की न्याय व्यवस्था का सामना करना होगा। उनके अनुसार, मनुष्य अपने कर्मों के लिए स्वयं जिम्मेदार है और भगवान श्री राम ही उसे उसके पापों का उचित फल देंगे।

अपनी जमीन बेचकर दिया था दान

सियाराम उमरवैश्य राम मंदिर निर्माण के पहले बड़े दानदाताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने अक्टूबर 2018 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ अपनी 16 बिस्वा जमीन बेच दी थी। उस दौरान उन्होंने मंदिर के लिए कुल 1 करोड़ रुपये का दान दिया था। अपनी इस उदारता की कहानी सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जमीन की बिक्री से उन्हें 85 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। इस राशि को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने बेटे, बहू और रिश्तेदारों से कुल 15 लाख रुपये एकत्र किए थे। उनका सपना था कि उनके जीवनकाल में ही राम मंदिर का भव्य स्वरूप सामने आए और उनके दिए हुए दान का सही और सदुपयोग हो।

चंदा चोरी पर गहरा दुख

चंदे में हुई धांधली को लेकर वे काफी दुखी हैं। उनका मानना है कि यदि चंदे का बंदरबांट न हुआ होता, तो प्रशासन को किसी को गिरफ्तार करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन बिना ठोस सबूत के किसी को भी जेल में बंद नहीं कर सकता। मामले की जांच चल रही है और गिरफ्तारियां हो रही हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी हुई है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि चंदा चोरी करने वाले न केवल कानून की नजर में अपराधी हैं, बल्कि वे समाज की नजरों में भी गिर चुके हैं। इससे उन सभी लोगों का दिल दुखा है, जिनकी आस्था भगवान राम में है और जिन्होंने मंदिर के लिए अपना योगदान दिया है।

राम के प्रति अटूट आस्था

इतने बड़े विवाद के बाद भी सियाराम उमरवैश्य का भगवान राम के प्रति विश्वास तनिक भी कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके मन में प्रभु श्री राम के लिए गहरी श्रद्धा है। उनका कहना है कि अगर भविष्य में मंदिर निर्माण या उसके विस्तार के लिए उन्हें और भी धनराशि की आवश्यकता पड़ी, तो वे 1 करोड़ रुपये तो क्या, 2 करोड़ रुपये तक दान देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अंत में दोहराया कि जो भी गलत कार्य हुआ है, उसका खुलासा प्रशासन करेगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी, ताकि भविष्य में इस तरह की पवित्र भेंट के साथ कोई और खिलवाड़ न कर सके।

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