भीषण गर्मी में पानी के लिए मचा त्राहिमाम
अंबाला छावनी के टांगरी बांध के पास बसी शिवपुरी कॉलोनी और गणेश विहार के निवासियों के लिए इस समय चिलचिलाती धूप से ज्यादा पानी की कमी सिरदर्द बनी हुई है। आलम यह है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। कई दिनों से जलापूर्ति ठप होने के कारण पूरा इलाका परेशान है और लोगों को पीने के साफ पानी के लिए अपने घरों से दूर दूसरे मोहल्लों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि घरेलू कामकाज करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।
चार-पांच दिनों से जारी है किल्लत
स्थानीय निवासी डोली ने समस्या की गंभीरता को बताते हुए कहा कि पिछले चार-पांच दिनों से उनके घरों में पानी की एक बूंद नहीं पहुंची है। खाना बनाने से लेकर सफाई और नहाने तक के काम पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। निवासियों का कहना है कि वे कई बार ट्यूबवेल ऑपरेटर के पास जाकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन उन्हें हमेशा यही सुनने को मिलता है कि ट्यूबवेल में तकनीकी खराबी है। मजबूरी का आलम यह है कि छोटे-छोटे बच्चों को भारी बाल्टियां उठाकर दूरदराज के इलाकों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। कभी-कभार अगर पानी आता भी है, तो उसका दबाव इतना कम होता है कि बर्तन भी नहीं भर पाते।
रात भर जागने को मजबूर निवासी
पानी के लिए लोगों को अपनी नींद तक कुर्बान करनी पड़ रही है। एक स्थानीय नागरिक नौशाद ने बताया कि पानी कब आएगा, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। इसी अनिश्चितता के कारण लोगों को पूरी-पूरी रात जागकर इंतजार करना पड़ता है। पिछले एक सप्ताह से हालात बदतर हो गए हैं। नौशाद का कहना है कि भीषण गर्मी में बिना पानी के रहना किसी सजा से कम नहीं है। प्रशासन की बेरुखी से जनता का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
नौकरी या पानी: क्या चुनें?
इस संकट ने स्थानीय लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा कर दिया है। निवासी शारीद के अनुसार, पानी आमतौर पर आधी रात को करीब एक घंटे के लिए छोड़ा जाता है, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में होते हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल आम हो गया है कि वे सुबह नौकरी पर जाएं या रात भर पानी का पहरा दें। क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए जो ट्यूबवेल बना है, उस पर कई इलाकों का भार है, जिससे दबाव कम हो जाता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान जल्द निकाला जाए ताकि लोगों को इस दोहरी मार से मुक्ति मिल सके।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
जब इस पूरे मामले पर ट्यूबवेल ऑपरेटर संजीव मल्होत्रा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र में कुल दो ट्यूबवेल लगाए गए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इनमें से एक ट्यूबवेल की मोटर में तकनीकी खराबी आ गई है। इससे पहले भी भीषण गर्मी के दौरान बिजली के तारों में आई खराबी के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसे बाद में दुरुस्त कर लिया गया था। अभी सिर्फ एक ट्यूबवेल के भरोसे पूरे इलाके की प्यास बुझाने की कोशिश की जा रही है, जो कि बड़े क्षेत्र के कारण संभव नहीं हो पा रहा है।
भविष्य के लिए क्या है योजना?
संजीव मल्होत्रा ने आश्वासन दिया है कि खराब मोटर की सूचना उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। जैसे ही मरम्मत का काम पूरा होगा, पानी की आपूर्ति फिर से सामान्य करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी माना कि बढ़ती आबादी और बढ़ते हुए दायरे के कारण इस क्षेत्र में एक अतिरिक्त ट्यूबवेल की तत्काल आवश्यकता है। इस दिशा में विभाग को एक प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। निवासियों को अब उम्मीद है कि जल्द ही अधिकारी इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे और उन्हें पानी के लिए मोहताज नहीं रहना बंद करना पड़ेगा।
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