ऐतिहासिक जीत और जश्न का माहौल
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इक्वाडोर की फुटबॉल टीम ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए फुटबॉल जगत को चौंका दिया है। जर्मनी जैसी दिग्गज टीम को 2-1 से हराकर इक्वाडोर ने नॉक आउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली है। यह पहला मौका है जब इक्वाडोर की टीम ने इस स्तर तक का सफर तय किया है। देश में इस कामयाबी का जश्न इतने बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है कि सरकार ने तुरंत प्रभाव से पूरे देश में राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा कर दी है। यह जीत टीम के लिए बेहद खास है क्योंकि पिछले 20 वर्षों में पहली बार टीम फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रही है।
राष्ट्रपति की तरफ से विशेष घोषणा
शुक्रवार, 26 जून को खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में जीत के बाद देश के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने सोशल मीडिया के माध्यम से खुशी जाहिर की और अवकाश की घोषणा की। राष्ट्रपति नोबोआ ने टीम के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम ने तमाम आलोचनाओं और मुश्किल हालातों का सामना करते हुए देश को हाल के इतिहास की सबसे बड़ी फुटबॉल उपलब्धि दी है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में खिलाड़ियों को धन्यवाद देते हुए लिखा कि जिन लोगों ने टीम को गालियां दीं और आलोचना की, उन्हें इन खिलाड़ियों ने अपने खेल से करारा जवाब दिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कल पूरे देश में छुट्टी रहेगी और इक्वाडोर जिंदाबाद के नारे गूंजेंगे।
मैच का आंखों देखा हाल और उतार-चढ़ाव
यह मुकाबला इक्वाडोर के लिए करो या मरो की स्थिति जैसा था। टूर्नामेंट के अपने शुरुआती दो मैचों में खराब प्रदर्शन के बाद टीम पर ग्रुप से बाहर होने का भारी खतरा मंडरा रहा था। इसके विपरीत, जर्मनी की टीम पहले ही ग्रुप E में शीर्ष पर रहते हुए नॉकआउट में अपनी जगह सुरक्षित कर चुकी थी और वह अपनी लय बरकरार रखना चाहती थी। इक्वाडोर के लिए स्थिति यह थी कि वह अब तक टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर पाई थी और हार की कोई भी गुंजाइश नहीं थी। मैच की शुरुआत इक्वाडोर के लिए बेहद निराशाजनक रही। खेल के दूसरे ही मिनट में जर्मनी के खिलाड़ी लेरॉय साने ने गोल करके अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी।
कैसे पलटी बाजी
शुरुआती गोल खाने के बाद इक्वाडोर ने हार नहीं मानी और संयम बनाए रखा। टीम को वह मौका मिला जिसका उसे पूरे टूर्नामेंट से इंतजार था। वीटे ने चालाकी दिखाते हुए गेंद छीनी और खेल में वापसी की राह खोली। इसके बाद निल्सन अंगुलो ने बॉक्स के बाहर से एक शानदार शॉट लगाया, जो पावलोविच के पैरों के बीच से होकर सीधे गोल पोस्ट में जा लगा। यह इस वर्ल्ड कप में इक्वाडोर का पहला गोल था, जिसने टीम को मुकाबले में बराबरी पर ला दिया।
मैच के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब दूसरे हाफ में जर्मनी के काई हैवर्ट्ज़ बॉक्स के अंदर गिर गए और रेफरी ने पेनल्टी देने का संकेत दिया। हालांकि, रीप्ले की जांच करने के बाद इस फैसले को बदल दिया गया क्योंकि अधिकारियों ने पाया कि शुरुआती बिल्ड-अप में साने ने फाउल किया था। यह फैसला इक्वाडोर के लिए संजीवनी साबित हुआ। खेल के 64वें मिनट में केविन रोड्रिगेज को मैदान पर उतारा गया, जिसने पूरे मैच की दिशा बदल दी। आखिरकार 77वें मिनट में रोड्रिगेज ने कॉर्नर पर भीड़भाड़ वाले इलाके में एक सटीक फ्लिक दी और गोंज़ालो प्लाटा ने फुर्ती दिखाते हुए गेंद को गोल में धकेल दिया। इस गोल के साथ ही इक्वाडोर की बेंच और पूरे देश में जश्न का माहौल बन गया।
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