भागलपुर का बरारी रिवर फ्रंट: जहां गंगा की लहरों पर डॉल्फिन और डूबते सूरज का होता है दीदार

भागलपुर का बरारी सीढ़ी घाट प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद सुकून भरी जगह है, जहाँ गंगा नदी में डॉल्फिन की अठखेलियां और ऐतिहासिक मंदिर का नजारा मन को शांति देता है।

भागलपुर की भागदौड़ से दूर सुकून का ठिकाना

आज के दौर में शहरों में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों और बढ़ती व्यस्तता के बीच हर व्यक्ति को कुछ पल शांति के चाहिए होते हैं। आमतौर पर बड़े शहरों में पार्क मिल तो जाते हैं, लेकिन असली प्राकृतिक सुकून ढूंढना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सीमेंट और लोहे की ऊंची इमारतों से दूर अगर आप बिहार के भागलपुर में हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन जगह है बरारी रिवर फ्रंट। यह स्थान आपको प्रकृति की गोद में होने का अहसास कराता है और मानसिक शांति प्रदान करने का एक सटीक जरिया है।

सीढ़ी घाट और गंगा की छटा

भागलपुर शहर की भागदौड़ से थोड़ा हटकर बरारी स्थित सीढ़ी घाट एक ऐसा स्थान है जहाँ शाम ढलते ही नज़ारा बदल जाता है। यहाँ पहुँचने वाले लोग अक्सर गंगा की अविरल बहती धारा के बीच डॉल्फिन की अठखेलियों का आनंद लेते हैं। डूबते हुए सूरज की सुनहरी किरणें जब गंगा के पानी पर पड़ती हैं, तो वह दृश्य देखते ही बनता है। यह स्थान स्थानीय लोगों के साथ ही अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बन रहा है, जो सुकून की तलाश में यहाँ खिंचे चले आते हैं।

राधा कृष्ण का ऐतिहासिक अष्टकोणीय मंदिर

बरारी रिवर फ्रंट की खूबसूरती को चार चांद लगाने का काम यहाँ स्थित राधा कृष्ण का अष्टकोणीय मंदिर करता है। स्थापत्य कला के लिहाज से यह मंदिर बेहद अनोखा है और माना जाता है कि पूरे भारत में इस प्रकार की बनावट का दूसरा कोई मंदिर मौजूद नहीं है। इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण बाबू ब्रज ठाकुर ने करवाया था, जो उस समय के जमींदार थे। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1905 में की गई थी, जो आज भी अपनी एक अलग पहचान रखता है।

संरक्षण की प्रतीक्षा करती भव्यता

समय के साथ यह मंदिर अब काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है और अपने गौरवशाली दिनों को वापस लाने की बाट जोह रहा है। हालांकि, मंदिर का ढांचा और उसकी भव्यता आज भी लोगों का मन मोह लेने के लिए काफी है। जो लोग यहाँ शांति की तलाश में आते हैं, वे इस मंदिर की वास्तुकला को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि इस धरोहर को उचित संरक्षण मिले और इसका जीर्णोद्धार किया जाए, तो यह फिर से अपनी पुरानी जीवंतता के साथ पर्यटकों के लिए एक प्रमुख तीर्थ और दर्शनीय स्थल बन सकता है। यहाँ की यात्रा का सबसे उपयुक्त समय शाम का वक्त है, जब घाट की शांति और वातावरण का संगम मन को अपार तृप्ति देता है।

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