गंभीर आरोपों से गरमाया मामला
दिल्ली से उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा तुषार और समीर की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। तुषार के परिजनों और भारतीय किसान यूनियन के एक पदाधिकारी ने प्रेस वार्ता के दौरान एटीएस के कुछ अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण में जिम संचालकों और एक कथित गिरोह का हाथ है, जो युवाओं को हनीट्रैप और अन्य तरीकों से फंसाने का काम कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है और न ही एटीएस ने इस पर अपना कोई आधिकारिक बयान दिया है।
सीबीआई जांच की मांग
परिजनों का आरोप है कि तुषार को साजिश के तहत फंसाया गया है। उनका कहना है कि दिल्ली, मेरठ और देहरादून में सक्रिय एक नेटवर्क हिंदू युवाओं को निशाना बना रहा है। प्रेस वार्ता में कुछ लोगों के नाम भी लिए गए हैं और यह आरोप लगाया गया है कि एटीएस के कुछ अधिकारी इस गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। परिजनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय एजेंसी यानी सीबीआई से कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
एटीएस की भूमिका पर संदेह
पीड़ित परिवार ने एटीएस के कुछ अधिकारियों के अतीत पर भी निशाना साधा है। उनका दावा है कि इन अधिकारियों ने पहले भी कई मामलों में गलत कार्रवाई की है और जिन लोगों को उन्होंने क्लीन चिट दी थी, बाद में अन्य एजेंसियों ने उनके खिलाफ पुख्ता सबूत पाए थे। परिवार का कहना है कि वे इस मामले में निष्पक्षता चाहते हैं और जब तक सीबीआई जांच नहीं होती, तब तक उन्हें न्याय की उम्मीद कम है। फिलहाल, यूपी एटीएस की ओर से इन तमाम आरोपों पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे मामला और भी अधिक पेचीदा हो गया है।
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