सद्गुरु का पहला बिहार दौरा: पटना पहुंचे ईशा फाउंडेशन के संस्थापक, बापू सभागार में होगा भव्य जनसंवाद

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु अपने पहले बिहार दौरे पर पटना पहुंच गए हैं। वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ चर्चा करने के साथ ही राज्य के सबसे बड़े सभागार में जनता से रूबरू होंगे।

पटना में पहली बार सद्गुरु का आगमन

ईशा फाउंडेशन के प्रणेता और प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु पहली बार बिहार की राजधानी पटना पहुंच गए हैं। उनके इस आधिकारिक दौरे की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है, जो 28 जून तक जारी रहेगा। अपने इस प्रवास के दौरान वे राज्य की राजधानी में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उनके बिहार आगमन को लेकर उनके अनुयायियों और आध्यात्मिक रुचि रखने वाले लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक

अपने निर्धारित दौरे के दौरान सद्गुरु राज्य के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ विशेष भेंट करेंगे, जिसमें राज्य के विभिन्न सामाजिक और विकासात्मक विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इस दौरान वे राज्य के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिलेंगे और विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे। 28 जून को अपने तय कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद वे वापस तमिलनाडु के लिए प्रस्थान करेंगे।

बापू सभागार में जनसंवाद का मुख्य आयोजन

सद्गुरु के दौरे का सबसे प्रमुख आकर्षण 27 जून को होने वाला जनसंवाद कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम पटना के गांधी मैदान के नजदीक स्थित बापू सभागार में आयोजित किया गया है। यह राज्य का सबसे बड़ा सभागार है, जहाँ सद्गुरु बड़ी संख्या में एकत्रित होने वाले लोगों को संबोधित करेंगे। इस जनसंवाद सत्र में वे लोगों के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखेंगे और उपस्थित श्रोताओं के सवालों के जवाब भी देंगे।

बांसघाट के कायाकल्प का करेंगे निरीक्षण

बिहार प्रवास के दौरान सद्गुरु पटना स्थित बांसघाट के आधुनिक शवदाह गृह का मुआयना कर सकते हैं। इस स्थल का नवीनीकरण और कायाकल्प ईशा फाउंडेशन के सहयोग से ही किया गया है। फाउंडेशन ने इस संवेदनशील स्थान पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, गरिमापूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए कई अत्याधुनिक सुविधाएं जुटाई हैं। यहां सेवा कार्य के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की एक टीम भी तैनात की गई है, जो शोक संतप्त परिवारों को हर संभव मदद मुहैया कराती है। इसके अलावा, अंतिम संस्कार के लिए अब एक तय शुल्क प्रणाली लागू की गई है ताकि पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

बांसघाट की आधुनिक सुविधाएं

बांसघाट का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है और इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। परिसर के मुख्य आकर्षणों में लगभग आठ फीट ऊंची काल भैरव की प्रतिमा शामिल है। साथ ही, अंतिम संस्कार से पूर्व धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए एक विशेष काल भैरव मंडप का निर्माण किया गया है। वर्तमान में यहाँ एक साथ 18 शवों का अंतिम संस्कार करने की क्षमता विकसित की गई है। परिजनों के लिए वातानुकूलित वेटिंग हॉल, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष तालाब

गंगा नदी से दूरी को देखते हुए, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में गंगाजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए परिसर में दो तालाब बनाए गए हैं। इनमें से एक तालाब का उपयोग स्नान और शुद्धि के कार्यों के लिए किया जाएगा, जबकि दूसरे का उपयोग अस्थि विसर्जन से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों के लिए होगा। ईशा फाउंडेशन का स्पष्ट मानना है कि इस परियोजना के पीछे का एकमात्र उद्देश्य अंतिम संस्कार जैसे कठिन समय को गरिमा के साथ संपन्न कराना है। इस पूरे सेवा कार्य में फाउंडेशन के ऐसे प्रशिक्षित स्वयंसेवक जुटे हैं, जो समाज सेवा को अपना परम कर्तव्य मानते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत होने के बावजूद अपना समय जनकल्याण के लिए समर्पित कर रहे हैं।

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