भरत तिवारी मामला: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने माता-पिता पर दर्ज केस वापस लेने का दिया निर्देश

बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई बड़े बदलाव किए हैं और जांच निष्पक्ष करने का आदेश दिया है।

मामले में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

बिहार के आरा से जुड़े भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने भरत तिवारी के माता-पिता और इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन करने वाले स्थानीय लोगों पर दर्ज किए गए मुकदमों को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है।

जांच अधिकारी पर गिरी गाज

इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने जगदीशपुर डीएसपी को तत्काल प्रभाव से जांच से हटाने का निर्देश दिया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि जांच पारदर्शी होनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

धीरेंद्र शास्त्री ने की कार्रवाई की मांग

इस प्रकरण में एक और बड़ा अपडेट यह है कि धीरेंद्र शास्त्री, जिन्हें बाबा बागेश्वर के नाम से जाना जाता है, जल्द ही भरत तिवारी के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात करेंगे। बाबा बागेश्वर ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी सनातन धर्म और हिन्दुत्व के लिए समर्पित थे।

न्यायपालिका पर भरोसा

बाबा बागेश्वर ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भरत तिवारी पर कोई आरोप था, तो उन्हें दंड देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास था। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शरण में आए, उसका वध करना शास्त्रों और मर्यादाओं के विरुद्ध है। भरत तिवारी ने आरा से पैदल चलकर छतरपुर धाम की यात्रा की थी और वे समाज में जात-पात से ऊपर उठकर काम करने के लिए जाने जाते थे।

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