भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ा कदम
भारत में करोड़ों लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी हर ऑनलाइन गतिविधि के तार सीधे अमेरिका से जुड़े हैं? जब भी आप कोई वेबसाइट खोलते हैं या ईमेल भेजते हैं, तो वह डेटा पहले अमेरिका स्थित रूट सर्वर पर जाता है। वर्तमान में भारत के पास अपना कोई रूट सर्वर नहीं है, जिसके कारण हमें पूरी तरह से विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहना पड़ता है।
क्यों जरूरी है भारत का अपना सर्वर
रूट सर्वर को इंटरनेट का मुख्य गेटवे या केंद्र माना जा सकता है। वर्तमान में दुनिया भर में केवल 13 मुख्य रूट सर्वर हैं, जिन्हें A से लेकर M तक के अल्फाबेट्स से पहचाना जाता है। इनमें से अधिकांश सर्वर अमेरिका में स्थित हैं, जबकि कुछ ही सर्वर नीदरलैंड्स, स्वीडन और जापान जैसे देशों में उपलब्ध हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन के अनुसार, भारत जैसे बड़े डिजिटल आधार वाले देश के लिए अपनी डिजिटल संप्रभुता बनाए रखना अब एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।
क्या है सरकार की नई रणनीति
डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने अब वैश्विक इंटरनेट संस्था ICANN के साथ बातचीत तेज कर दी है। सरकार की योजना भारत में उन 13 मुख्य रूट सर्वर को मिरर करने वाले 18 सर्वर का एक कलस्टर स्थापित करने की है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित होंगे:
- डिजिटल संप्रभुता: भारत को इंटरनेट संचालन के लिए विदेशी देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- साइबर सुरक्षा: देश में रूट सर्वर होने से किसी भी बड़े साइबर हमले की स्थिति में उसे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के गेटवे पर ही नियंत्रित किया जा सकेगा।
- बेहतर इंटरनेट अनुभव: स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग से वेबसाइट एक्सेस की गति और सुरक्षा में सुधार होगा।
फिलहाल, ICANN के रूट सर्वर सिंगापुर, यूरोप, अमेरिका, मिस्त्र और केन्या जैसे देशों में मौजूद हैं। भारत में इनका क्लस्टर स्थापित हो जाने के बाद देश की डिजिटल दुनिया अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र हो जाएगी।
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