चंदौली: मुगलसराय रेलवे कॉलोनी में जहरीले धुएं से लोगों का जीना दुश्वार, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित मुगलसराय में रेलवे कॉलोनी के पास पिछले एक महीने से जल रहे कूड़े के ढेर से लोगों का दम घुट रहा है। स्थानीय लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

गंभीर प्रदूषण की चपेट में मुगलसराय

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित मुगलसराय की सेंट्रल कॉलोनी, पुलिस कॉलोनी और मानस नगर कॉलोनी के निवासी इन दिनों एक भीषण समस्या से जूझ रहे हैं। इलाके में मौजूद कूड़े के एक बड़े ढेर में पिछले करीब एक महीने से लगातार आग लगी हुई है, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं पूरे क्षेत्र में फैल गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस धुएं के कारण सांस लेना भी मुश्किल हो गया है और प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक बना हुआ है।

स्वास्थ्य और आवागमन पर बुरा असर

स्थानीय अधिवक्ता संतोष पाठक का कहना है कि पुल के पास जल रहे इस कूड़े के कारण वहां से गुजरने वाले राहगीरों को अपनी सांस रोककर निकलना पड़ता है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शाम के वक्त धुएं के कारण विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि लोगों का आवागमन भी जोखिम भरा हो गया है। माधवेंद्र मूर्ति ओझा जैसे निवासियों के अनुसार, जलते हुए कचरे से निकलने वाली जहरीली गैसें बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे धुएं के संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता

लोगों ने बताया कि उन्होंने रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों से कई बार शिकायत की है। एक बार जेसीबी मशीन के जरिए कूड़े को हटाने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन वह केवल दिखावा साबित हुआ और समस्या जस की तस बनी हुई है। फायर ब्रिगेड की टीम ने भी पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले को लेकर जनप्रतिनिधि भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।

मानसरोवर तालाब की दुर्दशा

कचरे और धुएं की समस्या के साथ-साथ मानसरोवर तालाब के आसपास फैली गंदगी भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। नागरिकों ने बताया कि तालाब के आसपास कचरा जमा रहता है और इसकी सफाई केवल छठ पूजा जैसे विशेष धार्मिक अवसरों पर ही की जाती है। बाकी समय यह क्षेत्र गंदगी और बदबू से भरा रहता है।

स्थायी समाधान की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता अरुण द्विवेदी ने कहा कि इस मुद्दे पर कई बार ज्ञापन सौंपे गए और प्रदर्शन किए गए, लेकिन अब तक कोई स्थायी हल नहीं निकल पाया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन, नगर निकाय और रेलवे ने मिलकर इस समस्या का कोई प्रभावी समाधान नहीं निकाला, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। स्थानीय निवासी अब चाहते हैं कि केवल खानापूर्ति न हो, बल्कि कचरा निस्तारण की एक ऐसी व्यवस्था हो जिससे भविष्य में ऐसी स्थितियां दोबारा पैदा न हों।

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