राजस्थान की पहली वाद्ययंत्र गैलरी का आगाज
संगीत और कला की नगरी जयपुर में अब संगीत प्रेमियों के लिए एक नया और अनूठा ठिकाना तैयार हो गया है। शहर के झालाना स्थित राजस्थान प्रौढ़ शिक्षा समिति के परिसर में प्रदेश की पहली लोक संगीत वाद्ययंत्र गैलरी की शुरुआत की गई है। इस खास गैलरी में संगीत के शौकीन लोग राजस्थानी संस्कृति की झलक समेटे हुए 100 से अधिक पारंपरिक वाद्ययंत्रों को एक ही छत के नीचे देख सकते हैं। यह राजस्थान की अपनी तरह की पहली ऐसी स्थाई गैलरी है, जिसे जाजम फाउंडेशन की ओर से तैयार किया गया है।
संगीत परंपराओं का अनूठा संगम
इस गैलरी के निर्माण के पीछे की कहानी बताते हुए जाजम फाउंडेशन के नवीन माथुर ने साझा किया कि यह स्थान राजस्थान के विभिन्न अंचलों की सांगीतिक विरासत को समर्पित है। यहां उन वाद्ययंत्रों को संजोया गया है, जिन्हें लोक कलाकारों और संगीत से जुड़ी विशिष्ट जातियों द्वारा पीढ़ियों से बनाया और बजाया जा रहा है। इन वाद्ययंत्रों में से कुछ तो 100 वर्षों से भी अधिक पुराने हैं, जबकि इनकी परंपरा का इतिहास 500 वर्षों से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। इस गैलरी में बृज, मेवाड़, मेवात, मारवाड़, वागड़, हाड़ौती और शेखावाटी जैसे राजस्थान के प्रमुख अंचलों के लोक वाद्ययंत्रों को स्थान दिया गया है, जो प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हैं।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का लक्ष्य
गैलरी की स्थापना के मुख्य उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बात करते हुए नवीन माथुर ने बताया कि राजस्थान के सुदूर इलाकों में फैले लोक कलाकारों की कड़ी मेहनत और उनकी अद्भुत कारीगरी को सुरक्षित रखना ही इसका मुख्य ध्येय है। आज की युवा पीढ़ी, जिसने अक्सर ऐसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को देखा भी नहीं है, उन्हें इन वाद्ययंत्रों के इतिहास और उनके महत्व से परिचित कराने के लिए इस पहल की शुरुआत की गई है। यह गैलरी केवल वाद्ययंत्रों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की संस्कृति, वहां की लोक परंपराओं और कलाकारों के जीवन का एक जीवंत दस्तावेज है। शोधार्थियों, विद्यार्थियों और लोक कला में गहरी रुचि रखने वाले आम नागरिकों के लिए यह गैलरी अध्ययन का एक बड़ा केंद्र साबित होगी, जहां वे वाद्ययंत्रों को करीब से देख और समझ सकते हैं।
संग्रह में शामिल हैं ये दुर्लभ वाद्ययंत्र
इस गैलरी में सामान्य वाद्ययंत्रों से लेकर बेहद दुर्लभ वाद्ययंत्रों तक का एक व्यापक संग्रह मौजूद है। जहां एक ओर ढोलक, मंजीरे, तबला, हारमोनियम और सारंगी जैसे लोकप्रिय वाद्ययंत्र मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी उपकरण हैं जो अब बहुत कम देखने को मिलते हैं। संग्रह में शामिल प्रमुख वाद्ययंत्रों की सूची कुछ इस प्रकार है:
- जोगिया सारंगी और प्यालेदार सारंगी
- रावण हत्था और कमायचा
- तंदूरा और चोतारा
- वीणा और जंतर
- भपंग और डेरु
- डफ, मांदल और नौबत
- नगाड़ा, चंग, चिकारा, सुरिंदा और दुचका
- पाबूजी के माटे
कलाकारों और वाद्ययंत्रों का संरक्षण
जाजम फाउंडेशन लंबे समय से राजस्थान की लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत, लोक गीत, नृत्य और वाद्ययंत्रों के साथ-साथ इन्हें बनाने वाले कारीगरों की कला को बचाने और बढ़ावा देने के कार्यों में जुटा हुआ है। आधुनिक दौर में जब ये पारंपरिक वाद्ययंत्र और इन्हें बनाने वाले कारीगर लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब इस तरह की स्थाई गैलरी का निर्माण लोक विरासत को बचाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल पुरानी कलाओं को दस्तावेजी रूप में संरक्षित करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राजस्थान की सांगीतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
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