विवाद की जड़ में क्या है मामला
पश्चिम बंगाल में तैनात आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो का तबादला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। साल 2021 बैच की अधिकारी बुशरा बानो खड़गपुर में एडिशनल एसपी के पद पर कार्यरत थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 13 सितंबर 2026 को यूपीएससी उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करने के लिए एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया। इस वीडियो के दौरान उन्होंने 'अस्सलामुअलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जजाकल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, इसे लेकर एक तीखा विवाद खड़ा हो गया।
हिंदू संगठनों की शिकायत के बाद एक्शन
वीडियो सामने आने के बाद 'हिंदू लीगल फंड' नामक संगठन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और पश्चिम बंगाल के गृह सचिव को आधिकारिक शिकायत भेजी। संगठन का तर्क था कि एक उच्च पद पर तैनात सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक मंच पर अपनी धार्मिक तटस्थता बनाए रखनी चाहिए। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि उन्हें 'अस्सलामुअलैकुम' या 'इंशाअल्लाह' के स्थान पर 'जय हिंद' या 'वंदे मातरम्' जैसे राष्ट्रीय अभिवादनों का प्रयोग करना चाहिए था। इसी हंगामे के बीच 14 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार ने बुशरा बानो को उनके पद से हटाते हुए राज्य सशस्त्र पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर तैनात कर दिया।
मोहम्मद अजहरुद्दीन ने सरकार को घेरा
इस पूरे घटनाक्रम पर तेलंगाना सरकार के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। अजहरुद्दीन ने कहा कि केवल एक धार्मिक अभिवादन के कारण किसी अधिकारी का तबादला करना समझ से परे है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब अभिवादन भी किसी लोक सेवक को निशाना बनाने का जरिया बन गया है? अजहरुद्दीन ने अपने बयान में आगे कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित है, न कि इस तरह की पहचान आधारित पुलिसिंग में। उन्होंने सरकार के इस फैसले को अल्पसंख्यकों को गलत संदेश देने वाला बताया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
बुशरा बानो के तबादले के बाद से ही राज्य की राजनीति में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। टीएमसी के कई विधायक और सांसद इस मामले में बुशरा बानो के समर्थन में उतर आए हैं और सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी खेमा और कुछ संगठन इसे सरकारी सेवा में आचरण के नियमों के तहत देख रहे हैं। प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि क्या एक व्यक्तिगत अभिवादन को आधिकारिक कार्य से जोड़कर तबादले का आधार बनाया जाना सही है। फिलहाल, राज्य सरकार के इस निर्णय पर बहस जारी है और इस मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर एक नया विवाद पैदा कर दिया है।
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