एलओसी पर पाकिस्तान का नया टेरर जाल: तुर्की ड्रोन से जासूसी और जंगलों में स्टिकी बम की सप्लाई का खुलासा

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब सीमा पर घुसपैठ के बजाय हाई-टेक ड्रोन का इस्तेमाल कर भारत में हथियार और स्टिकी बम भेज रही है, जिसका खुलासा सुरक्षा एजेंसियों की जांच में हुआ है।

सीमा पार से नया खतरा

पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत के खिलाफ अपनी युद्ध नीति में बड़ा बदलाव किया है। अब वे सीधे तौर पर आतंकवादियों को घुसपैठ कराने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं क्योंकि भारतीय सेना ने सीमा पर सुरक्षा चक्र को काफी मजबूत कर दिया है। इसके बजाय, अब पाकिस्तान हाई-टेक ड्रोन तकनीक के जरिए भारत की शांति भंग करने की साजिश रच रहा है। ताजी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान अब नियंत्रण रेखा यानी एलओसी के उस पार से तुर्की में बने आधुनिक ड्रोन के जरिए जासूसी कर रहा है और भारत के अंदरूनी इलाकों में हथियारों की खेप गिरा रहा है।

तुर्की ड्रोन से निगरानी और जासूसी

पाकिस्तान की मिलिट्री यूनिट्स ने अब खिलौने वाले छोटे ड्रोन के बजाय काफी उन्नत तकनीक वाले ड्रोन का सहारा लेना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा के करीब मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन और तुर्की में निर्मित बयारक्तार टीबी2 जैसे घातक ड्रोन तैनात किए गए हैं। इन आधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है: पहला, सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों और जवानों के मूवमेंट पर आसमान से बारीक नजर रखना। दूसरा, भारतीय राडार के उन कमियों वाले स्थानों को पहचानना जहां से छोटे ड्रोन बिना पकड़ में आए सीमा पार कर सकें। तीसरा, लॉन्च पैड्स पर मौजूद आकाओं को रियल-टाइम लोकेशन और डेटा भेजना ताकि हथियारों की ड्रॉपिंग का सटीक समय तय किया जा सके।

बारामूला के जंगल बने ड्रॉप जोन

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर से बचने के लिए पाकिस्तान अब बारामूला के घने जंगलों को अपना नया ठिकाना बना रहा है। गोगल दारा के जंगल विशेष रूप से आतंकवादियों के लिए ड्रॉप जोन बनकर उभरे हैं। यहां रात के अंधेरे में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले मल्टीरोटर ड्रोन का इस्तेमाल करके हथियार और नकदी पहुंचाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के अंदर सक्रिय आतंकी मॉड्यूल्स को बिना किसी मानवीय जोखिम के रसद उपलब्ध कराना है।

ड्रोन से क्या-क्या भेज रहा है पाकिस्तान?

ड्रोन के जरिए गिराई जा रही खेप में काफी खतरनाक चीजें शामिल हैं जो देश की सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • छोटे और आधुनिक ऑटोमैटिक हथियार, जिन्हें आसानी से छुपाया जा सकता है।
  • मैग्नेटिक स्टिकी बम, जिनका इस्तेमाल गाड़ियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
  • चीन निर्मित खास तिकोने आकार के हैंड ग्रेनेड।
  • स्थानीय आतंकी नेटवर्क को वित्तपोषित करने के लिए भारतीय नोटों की भारी खेप।

भारतीय सुरक्षा बलों का कड़ा एक्शन

पाकिस्तानी ड्रोन की इस नई चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय सेना, बीएसएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने मिलकर एक अभेद्य एंटी-ड्रोन ग्रिड तैयार किया है। हाल के दिनों में कई ऑपरेशन के दौरान ड्रोन और उनके साथ गिराए गए हथियारों को बरामद किया गया है। घगवाल के पलूरा गांव में सुरक्षा बलों ने एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, जिससे पिस्तौल, जिंदा कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद हुए। वहीं, अखनूर इंटरनेशनल बॉर्डर पर एक बड़े हेक्साकोप्टर ड्रोन को मार गिराया गया, जिसमें एम4 कार्बाइन की मैगजीन और स्टिकी बम बंधे हुए थे। इसी तरह कठुआ सेक्टर में भी बीएसएफ ने एक भारी ड्रोन को निशाना बनाया और उससे चीनी पिस्तौल व विस्फोटक सामग्री जब्त की।

इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से ध्वस्त हो रही साजिशें

पाकिस्तान का यह एरियल नेटवर्क केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ों तक फैला हुआ है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों ने अपने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से इस नेटवर्क को लगभग अपाहिज बना दिया है। पूंछ के कठिन पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान ड्रोन से गिराई गई छोटी बैरल वाली बंदूकें और भारतीय करेंसी बरामद की है। आरएस पुरा सेक्टर में भारतीय सेना और बीएसएफ ने इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का उपयोग करके कई मल्टीरोटर ड्रोन के सिग्नल्स को बीच हवा में ही काट दिया, जिससे उन्हें जमीन पर गिरना पड़ा। इन ड्रोन से एके-47 के कारतूस और आईईडी बनाने का सामान बरामद हुआ। सांबा सेक्टर में भी सुरक्षा बलों ने एक ड्रोन को मार गिराने में सफलता पाई, जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेटिक आईईडी ले जा रहा था।

सुरक्षा बलों की भावी रणनीति

पाकिस्तान की इस तकनीक आधारित चाल को विफल करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति में अत्याधुनिक बदलाव किए हैं। सीमा पर अब केवल मानव निगरानी ही काफी नहीं है, बल्कि तकनीक को भी प्राथमिकता दी जा रही है:

  • एंटी-ड्रोन गन और जैमर्स: सीमा पर तैनात किए गए आधुनिक जैमर्स दुश्मन के ड्रोन का उनके कंट्रोल रूम से संपर्क पलक झपकते ही काट देते हैं।
  • थर्मल और नाइट-विज़न कैमरे: रात के समय कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को ट्रैक करने के लिए हाई-टेक कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं।
  • स्थानीय इंटेलिजेंस: सीमावर्ती गांवों के लोगों को जागरूक किया गया है ताकि वे किसी भी संदिग्ध ड्रोन की आवाज या गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा अधिकारियों को दे सकें।

भारतीय एजेंसियों की इन तैयारियों ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को एक के बाद एक विफल कर दिया है, जिससे सीमा पार बैठे आकाओं की हताशा साफ देखी जा सकती है।

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