हार्ट अटैक के शुरुआती 10 मिनट बचा सकते हैं जान, इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

हार्ट अटैक आने पर घबराहट के बजाय सही तरीके से की गई कोशिशें किसी की जान बचा सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन 10 मिनटों का सही इस्तेमाल कैसे करना है, आइए विस्तार से जानते हैं।

हार्ट अटैक के दौरान क्यों जरूरी हैं शुरुआती 10 मिनट

दिल का दौरा पड़ना एक गंभीर मेडिकल आपातकाल है। इस स्थिति में व्यक्ति अक्सर डर के मारे घबरा जाता है और गलत कदम उठा बैठता है, जिससे स्थिति और भी बिगड़ जाती है। मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर समीर गुप्ता के अनुसार, हार्ट अटैक के लक्षण महसूस होते ही जो शुरुआती 10 मिनट होते हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर उस समय सही कदम उठाए जाएं, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

दिल के स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो या आप खुद को पूरी तरह फिट महसूस क्यों न कर रहे हों, यह समझना जरूरी है कि 47% हार्ट अटैक उन लोगों में देखे जाते हैं जो पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे थे। इसलिए हर व्यक्ति को पता होना चाहिए कि अचानक सीने या शरीर में दिक्कत महसूस होने पर क्या करना है।

क्या हैं हार्ट अटैक के मुख्य लक्षण

अगर आपको अचानक से बाएं हाथ में तेज दर्द, सीने पर भारीपन या ऐसा महसूस हो जैसे कोई छाती पर बैठा हो, बिना किसी स्पष्ट वजह के जबड़े में दर्द, अचानक जी मिचलाना या अत्यधिक पसीना आना जैसे लक्षण दिखें, तो ये हार्ट अटैक की चेतावनी हो सकते हैं। इन संकेतों को मिलते ही आपके पास मौजूद 10 मिनट का समय बेहद कीमती है।

संकट के समय तुरंत अपनाएं ये उपाय

  • एंबुलेंस को कॉल करें: लक्षण महसूस होते ही सबसे पहले एंबुलेंस को फोन करें। कभी भी यह इंतजार न करें कि स्थिति अपने आप ठीक हो जाएगी। अक्सर लोग इसे केवल गैस या हार्टबर्न मानकर गलती करते हैं। हैरानी की बात यह है कि 40% महिलाएं हार्ट अटैक आने पर एंबुलेंस नहीं बुलातीं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक पैनिक अटैक है। ऐसी गलती बिल्कुल न करें।
  • एस्पिरिन का उपयोग: हमेशा अपने पास या घर में एस्पिरिन या ब्लड थिनर दवाएं रखें। लक्षण महसूस होते ही 325 mg एस्पिरिन चबाएं। इसे निगलने की जगह चबाना इसलिए जरूरी है क्योंकि चबाने से यह दवा शरीर में 3 गुना तेजी से घुलती है। एस्पिरिन रक्त को पतला करने और थक्के जमने की रफ्तार को कम करने का काम करती है।
  • बैठ जाएं, लेटना नहीं है: हार्ट अटैक के समय लेटना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे दिल पर दबाव बढ़ जाता है। आप किसी कुर्सी, दीवार या हेडबोर्ड का सहारा लेकर सीधे बैठ जाएं। शरीर पर मौजूद तंग चीजों जैसे बेल्ट, कॉलर, ब्रा या कपड़ों के बटन को ढीला कर लें ताकि सांस लेने में दिक्कत न हो।
  • शारीरिक गतिविधि रोकें: इस स्थिति में बिल्कुल भी चलें-फिरें नहीं। हर हलचल दिल को अधिक काम करने और अधिक रक्त पंप करने के लिए मजबूर करती है। शांत बैठकर गहरी सांसें लें और तुरंत अपने किसी करीबी को मदद के लिए फोन करें।

महिलाओं में अलग हो सकते हैं लक्षण

महिलाओं में दिल के दौरे के लक्षण पुरुषों से भिन्न हो सकते हैं। हर बार हाथ में दर्द हो, ऐसा जरूरी नहीं है। यदि किसी महिला को पिछले 1 घंटे के भीतर बिना किसी कारण के भारी थकान महसूस हो, जी मिचलाने लगे, कंधे की हड्डियों के बीच दर्द हो या सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे हल्के में न लें। ऐसी स्थिति को तुरंत गंभीरता से लेना चाहिए।

इन जीवन रक्षक उपायों को खुद समझें और अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर पति और बच्चों को भी सिखाएं। अक्सर 47% मामलों में मरीज के पास उनका सबसे करीबी व्यक्ति ही होता है, लेकिन जानकारी के अभाव में वे सही मदद नहीं कर पाते। सही समय पर लिया गया निर्णय किसी की जिंदगी सुरक्षित कर सकता है।

https://www.indiatv.in/health/those-10-minutes-can-save-life-do-this-as-soon-as-symptoms-of-heart-attack-appear-2026-09-16-1243438