पेंटागन की चेतावनी और ट्रंप का फैसला
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक ओर अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है, तो वहीं दूसरी ओर तेहरान भी अपनी आक्रामक प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हट रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर एक अत्यंत बड़े और निर्णायक हमले की धमकी दी थी, लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि उन्होंने इस 'मैसिव अटैक' वाले प्लान पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण पेंटागन से आई एक गंभीर चेतावनी है। अमेरिकी प्रशासन को दी गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अमेरिका के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार बहुत तेजी से घट रहा है। यह कमी अमेरिकी रक्षा नीति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।
युद्ध का विस्तार और खाड़ी देशों की भागीदारी
युद्ध के मैदान से आ रही जानकारियां काफी चिंताजनक हैं। मिडिल-ईस्ट में हालात अब आर-पार की जंग में बदल चुके हैं। कुवैत और बहरीन पर मंडराते खतरों के बीच ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि खाड़ी के अन्य देश भी इस संघर्ष में सीधे तौर पर खिंचते जा रहे हैं। ईरान ने ब्रिटेन को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि उसने अमेरिका का साथ दिया, तो उसकी जमीन और सैनिक ईरानी मिसाइलों के सीधे निशाने पर होंगे। दूसरी ओर, यमन के हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों को मिसाइलों और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान के खिलाफ बहरीन और कुवैत ने पहली बार एकजुट होकर सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लिया है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपना सहयोग दिया है।
ट्रंप की आखिरी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले बंद नहीं हुए, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण पुलों पर अब तक का सबसे भीषण हमला करेगा। हालांकि, ईरान ने घुटने टेकने के बजाय युद्ध को और विस्तार दे दिया है। ईरानी सेना ने बहरीन के ईसा एयर बेस और जॉर्डन स्थित अल-अजरक सैन्य बेस पर घातक 'आराश' आत्मघाती ड्रोनों के जरिए सीधा हमला किया है। ऐसी स्थिति में, जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है, ट्रंप का सेना को 'हमला रोकने' का आदेश देना दुनिया भर के रणनीतिकारों के लिए हैरान करने वाला है।
अमेरिकी रक्षा भंडार में भारी कमी
न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सलाहकारों और कैबिनेट मंत्रियों के साथ एक लंबी उच्च-स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक के बाद ही उन्होंने ईरान पर किसी भी बड़े हवाई हमले को रोकने का निर्देश दिया। सैन्य जानकारों और ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने प्रशासन को आगाह किया है कि पिछले कुछ हफ्तों के लगातार हमलों के कारण अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक अमेरिकी सेना मिडिल-ईस्ट में 1200 से ज्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुकी है। यदि युद्ध की तीव्रता यही रही, तो अमेरिका के लिए अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की रक्षा करना कठिन हो जाएगा।
ट्रंप की चीन और रूस को सीधी चेतावनी
अपनी रणनीति को स्पष्ट करते हुए, ट्रंप ने रूस और चीन को भी इस जंग से दूर रहने की कड़ा संदेश दिया है। ट्रंप का दावा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को हथियारों की आपूर्ति नहीं करेंगे। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ, तो इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे। राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान के 250 जेट और 159 जहाज नष्ट हो चुके हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब बहुत कम ड्रोन बचे हैं और वे बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं, हालांकि अभी डील का सही समय नहीं आया है।
यूक्रेन के साथ गुप्त साझेदारी
इस संघर्ष में एक बड़ा मोड़ अमेरिका और यूक्रेन के बीच हुई एक गुप्त सैन्य साझेदारी को लेकर आया है। वाशिंगटन और कीव के बीच डेटा और इंटेलिजेंस साझा करने की डील हुई है। यूक्रेन के पास ईरानी शाहिद-136 ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स को जाम करने और उन्हें ट्रैक करने की विशेषज्ञता है। अमेरिका अब इसी तकनीकी जानकारी का उपयोग ईरान के खिलाफ कर रहा है। इसके अलावा, यूक्रेन की 'मगुरा ड्रोन बोट' तकनीक को अपनाकर अमेरिका होर्मुज में ईरान की छोटी और तेज हमलावर बोट्स का मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है।
ईरान का नया मोर्चा और ब्रिटेन को धमकी
ईरान अब केवल मिडिल-ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके हमले का दायरा यूरोप तक फैल सकता है। 25 जुलाई को आईआरजीसी (IRGC) के प्रवक्ता ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि यदि उसने अमेरिकी बॉम्बर विमानों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने दिया, तो ब्रिटेन ईरानी मिसाइलों का वैध निशाना होगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका का समर्थन करने वाले किसी भी देश को अब उनके गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
परमाणु मिशन और नतांज का बंकर
ट्रंप ने नतांज परमाणु परिसर के पास पहाड़ के भीतर स्थित 100 मीटर गहरे बंकर को नष्ट करने की मंशा जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है, अन्यथा वह पूरे अरब जगत के लिए खतरा बन जाएगा। दावा किया जा रहा है कि इस मिशन में यूक्रेन भी मदद के लिए आगे आया है, जहां जेलेंस्की ने ईरान के ड्रोन और मिसाइल तंत्र को तबाह करने में तकनीकी सहायता का भरोसा दिलाया है।
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