डीके शिवकुमार को एक और झटका, वरिष्ठ मंत्री केएच मुनियप्पा ने खाद्य विभाग संभालने से किया इनकार

कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। वरिष्ठ मंत्री केएच मुनियप्पा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का प्रभार लेने से इनकार करते हुए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से हस्तक्षेप की मांग की है।

कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अगुवाई वाली नई कांग्रेस सरकार के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा ने उन्हें सौंपे गए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का प्रभार ग्रहण करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी भी विभागों के आवंटन से नाराज होकर इस्तीफे की घोषणा कर चुके हैं। लगातार दूसरे वरिष्ठ नेता की नाराजगी ने सरकार और पार्टी नेतृत्व की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

मुनियप्पा का दो टूक इनकार

बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुनियप्पा ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के तौर पर कार्यभार नहीं संभालेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं की गरिमा और उनके अनुभव का सम्मान करते हुए विभागों के बंटवारे में हुई चूक को दुरुस्त करना चाहिए।

मैं खाद्य विभाग का प्रभार नहीं लूंगा। जब तक पार्टी हाईकमान इस मामले पर ध्यान देकर उचित निर्णय नहीं लेता, तब तक मैं मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण नहीं करूंगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके मुनियप्पा ने अपने लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि विभागों का आवंटन करते समय वरिष्ठता को ध्यान में रखा जाना चाहिए था। उनके मुताबिक पार्टी नेतृत्व का दायित्व है कि वह ऐसा निर्णय ले, जिससे संगठन और जनता दोनों का भरोसा कायम रहे।

खरगे से हस्तक्षेप की अपील

मुनियप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी इस मामले में दखल देने की अपील की। उन्होंने कहा कि खरगे को एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए सभी नेताओं को साथ लेकर चलना चाहिए था। उन्हें उम्मीद है कि पार्टी अध्यक्ष इस विवाद को सुलझाने के लिए आगे आएंगे।

उन्होंने बताया कि अपनी नाराजगी से उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया है। इस मुद्दे पर वह राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से भी चर्चा कर चुके हैं। मुनियप्पा को भरोसा है कि जल्द ही कोई हल निकल आएगा। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर निशाना साधने से इनकार किया, मगर यह दोहराया कि विभागों के बंटवारे में हुई गलती को सुधारा जाना चाहिए।

असंतोष की जड़ें

उनके इस बयान को कांग्रेस सरकार के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से खफा हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को अपेक्षाकृत प्रभावशाली जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं को उनकी अपेक्षाओं के मुताबिक विभाग नहीं मिले।

मुनियप्पा का राजनीतिक कद

मुनियप्पा की नाराजगी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि उनकी गिनती कर्नाटक कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में होती है। सात बार सांसद रह चुके मुनियप्पा फिलहाल देवनहल्ली से विधायक हैं और दलित समुदाय के प्रभावशाली चेहरे माने जाते हैं। यूपीए सरकार के दौरान वह केंद्र में मंत्री भी रहे हैं। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और जमीनी राजनीति में मजबूत पकड़ की वजह से संगठन में उनकी विशेष अहमियत है। उनकी बेटी एम. रूपकला शशिधर भी सक्रिय राजनीति में हैं और केजीएफ सीट से दो बार विधायक रह चुकी हैं।

कांग्रेस के सामने चुनौती

रामलिंगा रेड्डी के बाद अब मुनियप्पा के विरोध ने यह जता दिया है कि नई सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर नाराजगी सिर्फ एक नेता तक सीमित नहीं है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रहेगी कि नाराज नेताओं को कैसे मनाया जाए और सरकार के भीतर एकजुटता कैसे बनी रहे। फिलहाल लगातार दूसरे वरिष्ठ मंत्री के विरोध ने यह साफ कर दिया है कि कर्नाटक कांग्रेस में सब कुछ सामान्य नहीं है और आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व को इस असंतोष को गंभीरता से संभालना होगा।

https://hindi.news18.com/news/nation/karnataka-congress-crisis-unhappy-minister-muniyappa-refuses-to-take-charge-of-food-ministry-ws-l-10542691.html