देश के लाखों सरकारी कर्मचारी इस समय 8वें वेतन आयोग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब से सरकार ने इस आयोग का गठन किया है, तभी से वेतन में संभावित बढ़ोतरी को लेकर तरह-तरह के कयास और कैलकुलेशन लगाए जा रहे हैं। कभी फिटमेंट फैक्टर की चर्चा होती है तो कभी न्यूनतम वेतन बढ़ाने की। अब इन सबके बीच एक नया मुद्दा सामने आया है, जिसे कैलोरी फैक्टर कहा जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्मचारी की सैलरी में बढ़ोतरी कैलोरी के आधार पर तय की जा सकती है।
वेतन आयोग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस बार कैलोरी का आंकड़ा 3,490 रखा जा सकता है। कर्मचारी संगठनों ने भी इसी आंकड़े के आधार पर वेतन बढ़ाने की मांग रखी है। यदि ऐसा होता है तो 18 हजार रुपये की मिनिमम सैलरी बढ़कर सीधे 69000 रुपये तक पहुंच जाएगी। आइए इस पूरे फैक्टर को विस्तार से समझते हैं।
कैलोरी और सैलरी का आपस में क्या संबंध है
पोषण यानी कैलोरी के आधार पर वेतन तय करने की परंपरा करीब 70 साल पुरानी है। साल 1957 में आयोजित 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) में यह तय किया गया था कि एक श्रमिक को न्यूनतम पोषण के तौर पर हर दिन 2,700 कैलोरी की जरूरत होती ही है। इसी वजह से वेतन निर्धारित करते समय इस आंकड़े का ध्यान रखना जरूरी माना गया। इसके साथ ही कपड़ों, मकान के किराए और ईंधन पर होने वाले खर्च को भी वेतन तय करते समय जोड़ा जाता है।
बाद में इस फॉर्मूले को सुप्रीम कोर्ट ने भी मान्यता दी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि न्यूनतम वेतन का 25 फीसदी हिस्सा शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य सामाजिक दायित्वों के लिए सुरक्षित रखना होगा।
पिछले आयोग में भी रहा वही पुराना आंकड़ा
साल 2016 में जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ था, तब भी कैलोरी का फॉर्मूला 2,700 ही रखा गया था। इसी आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तय की गई थी। अब कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि कैलोरी का यह आंकड़ा काफी कम है और मौजूदा हालात में इसके आधार पर वेतन की गणना करना उचित नहीं है। इसलिए उनकी मांग है कि 8वें वेतन आयोग में वेतन तय करते समय सरकार को कैलोरी का आंकड़ा बढ़ाने पर गौर करना चाहिए।
3,490 कैलोरी का फॉर्मूला कहां से आया
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन ने श्रमिकों के लिए प्रतिदिन न्यूनतम कैलोरी की सीमा 3,490 तय की है। इसके लिए तीन तरह की जॉब कैटेगरी बनाई गई हैं।
- ऑफिस में काम करने वाले पुरुषों के लिए प्रतिदिन 2,110 कैलोरी और महिलाओं के लिए 1,660 कैलोरी की सीमा रखी गई है।
- पोस्टमैन और बिजली विभाग में काम करने वाले पुरुषों के लिए 2,710 किलोकैलोरी तथा महिलाओं के लिए 2,130 किलोकैलोरी का लक्ष्य निर्धारित है।
- खान और सिक्योरिटी में लगे कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन 3,490 किलोकैलोरी का लक्ष्य तय किया गया है।
कैलोरी के आधार पर कैसे तय होगा वेतन
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन तय करते समय परिवार के सदस्यों की संख्या को भी ध्यान में रखना होगा और फूड बास्केट में खाद्य पदार्थों की संख्या भी बढ़ानी होगी। उनके अनुसार 5 सदस्यों वाले परिवार में हर महीने कम से कम 35 लीटर दूध की खपत का आंकड़ा शामिल करना चाहिए। 3,490 कैलोरी को भी इन्हीं खाद्य पदार्थों से मिलने वाली ऊर्जा से जोड़ा गया है।
इसी आधार पर खाद्य उत्पादों की बाजार कीमत और हर महीने उन पर आने वाले खर्च को जोड़कर वेतन तय करने की मांग की जा रही है। संगठनों का यह भी कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 फीसदी बेसिक खर्च का जो आंकड़ा काफी पहले तय किया था, वह अब दोगुने से भी अधिक हो चुका है। इस लिहाज से अगर 2026 में न्यूनतम वेतन की गणना की जाए तो यह करीब 69 हजार रुपये के आसपास पहुंच जाएगा।
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