राजस्थान के धीरज वैष्णव ने दिल्ली में बिखेरा सुरों का जादू, पीएम मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री को दी ये सलाह

उदयपुर के युवा संतूर वादक धीरज वैष्णव ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में अपनी कला से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जापान की प्रधानमंत्री को संतूर सिखाने का सुझाव दिया।

दिल्ली में गूंजी राजस्थान के कलाकार की धुन

नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में हाल ही में भारत और जापान के बीच आयोजित एक भव्य राजकीय समारोह के दौरान राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले एक युवा कलाकार धीरज वैष्णव ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। जैसे ही धीरज ने संतूर के तार छेड़े, वहां मौजूद सभी अतिथियों की निगाहें उनकी ओर टिक गईं। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के सम्मान में किया था। धीरज वैष्णव के संतूर वादन की जादुई धुन ने न केवल वहां मौजूद मेहमानों को प्रभावित किया, बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी भी उनकी प्रशंसा करने से खुद को नहीं रोक सके।

मंच से प्रधानमंत्री मोदी की अनूठी टिप्पणी

समारोह के दौरान एक बेहद रोचक और आत्मीय पल तब आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तुति के बीच में धीरज को रुकने का संकेत दिया। प्रधानमंत्री ने हंसते हुए जापान की प्रधानमंत्री की ओर इशारा किया और धीरज से कहा कि वे उन्हें भी संतूर बजाने की शुरुआती तकनीक सिखाएं। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी ने वहां का माहौल खुशनुमा बना दिया। इस घटना के बाद धीरज वैष्णव ने जापान की प्रधानमंत्री को संतूर वादन की बुनियादी जानकारियां भी दीं। इस पूरे वाकये का वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी साझा किया है, जो इंटरनेट पर काफी वायरल हो रहा है और लोग इस पल की जमकर सराहना कर रहे हैं।

उदयपुर के गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

धीरज वैष्णव राजस्थान के उदयपुर जिले के समीप बसे एक छोटे से गांव डांगियों की हुंदर के रहने वाले हैं। धीरज का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां संगीत की नींव बहुत मजबूत थी। उनके पिता गोपालदास वैष्णव क्षेत्र के जाने-माने भजन गायक हैं, जिसके चलते धीरज को बचपन से ही संगीत के प्रति लगाव पैदा हुआ। घर में संगीत का वातावरण होने के कारण उनकी रुचि इस कला के प्रति बढ़ती चली गई और उन्होंने इसे ही अपना करियर बनाने का निश्चय किया।

संगीत की बारीकियां और प्रशिक्षण

धीरज की औपचारिक संगीत शिक्षा की शुरुआत वर्ष 2014 में उदयपुर से हुई, जब उन्होंने पंडित रामकृष्ण बोस के सानिध्य में तबला वादन सीखना प्रारंभ किया। तबले की शिक्षा ने उन्हें संगीत की लय और ताल की गहरी समझ प्रदान की। करीब 5 साल पहले उन्होंने सोपोरी सूफ़ियाना घराना की समृद्ध परंपरा के अंतर्गत संतूर सीखने की शुरुआत की। वर्तमान में वह दिल्ली में पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी के पुत्र और ख्याति प्राप्त संतूर वादक पंडित अभय रुस्तम सोपोरी के मार्गदर्शन में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही, वह इस घराने के वरिष्ठ शिष्य दिव्यांश हर्षित श्रीवास्तव से भी संतूर की उन्नत तकनीकें सीख रहे हैं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान

अपनी निरंतर साधना, अनुशासन और कठिन परिश्रम के बल पर धीरज ने बहुत ही कम समय में संगीत जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। वह साल 2025 में विश्व संतूर दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। इसके अलावा वह कई महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों में भी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में संपन्न हुए भारत-जापान राजकीय समारोह में प्रस्तुति देना उनके करियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस गरिमामयी समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प

धीरज वैष्णव का मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और सोपोरी सूफ़ियाना घराना की विरासत को आगे बढ़ाना ही उनका मुख्य लक्ष्य है। इसके लिए वह दिन-रात रियाज कर रहे हैं। उदयपुर जैसे छोटे से स्थान से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे धीरज की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राजस्थान का मान बढ़ाया है। आज उनका यह सफर देश के अन्य युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया है, जो कला के क्षेत्र में कुछ नया करने की चाह रखते हैं।

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