मेटा की बढ़ी मुश्किलें: इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर भारत सरकार ने फिर भेजा सख्त नोटिस, 3 दिन में दूसरी बार तलब

भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा को इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापन प्रसारित करने के मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

भारत सरकार ने सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा के खिलाफ अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम पर प्रसारित हो रहे आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर मेटा को एक नया नोटिस जारी किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को लेकर सरकार किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं दिख रही है।

मार्क जुकरबर्ग की अगुवाई वाली कंपनी मेटा के लिए यह पिछले तीन दिनों के भीतर दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले सरकार ने कंपनी के लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर यूजरनेम से जुड़े एक संवेदनशील मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। अब इंस्टाग्राम पर बेहद आपत्तिजनक विज्ञापनों के सक्रिय होने की वजह से सरकार ने कंपनी के अधिकारियों को तलब किया है और उनसे इस बड़ी लापरवाही पर तुरंत जवाब देने को कहा है।

बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर सरकार सख्त

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला इंस्टाग्राम पर दिखाए जा रहे कुछ ऐसे विज्ञापनों से जुड़ा है, जिनमें बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक और अत्यंत संवेदनशील कंटेंट (CSAM) शामिल था। इस तरह की गंभीर सामग्री का सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से विज्ञापन के रूप में दिखना सुरक्षा और कानून के लिहाज से बेहद चिंताजनक माना जाता है।

इस संवेदनशील चूक का पता चलते ही भारत सरकार ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया। सरकार की ओर से जारी किए गए नोटिस में मेटा से स्पष्ट और ठोस जवाब मांगा गया है कि आखिर उनके सुरक्षा फिल्टर को पार करके इस तरह के विज्ञापन लाखों यूजर्स तक कैसे पहुंच गए।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

इस पूरे घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने MeitY के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक कंटेंट के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्रीय मंत्री के निर्देश के बाद मंत्रालय के अधिकारियों ने मेटा से निम्नलिखित तीखे सवाल पूछे हैं:

  • यह आपत्तिजनक विज्ञापन इंस्टाग्राम जैसे वैश्विक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने के लिए कैसे अप्रूव हुए?
  • मेटा का विज्ञापन समीक्षा और अनुमोदन तंत्र इस गंभीर उल्लंघन को शुरुआत में ही रोकने में कैसे पूरी तरह विफल रहा?
  • मेटा द्वारा बार-बार विज्ञापित किए जाने वाले सुरक्षा दावे, जिसमें डिटेक्शन और प्रिवेंशन सिस्टम शामिल हैं, वे इस मामले में काम क्यों नहीं कर रहे थे?

मेटा ने विज्ञापनों को हटाया, दी सुरक्षा पर सफाई

सरकार के इस सख्त रुख और नोटिस के बाद मेटा ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने उन सभी आपत्तिजनक विज्ञापनों को इंस्टाग्राम से पूरी तरह हटा लिया है। इसके साथ ही मेटा ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं और इसके उल्लंघन को एक बेहद गंभीर अपराध की तरह देखते हैं।

अपनी सुरक्षा प्रणालियों का बचाव करते हुए मेटा ने बताया कि उनके पास आपत्तिजनक विज्ञापनों और सामग्रियों को रोकने के लिए कई तरह के सुरक्षा चक्र मौजूद हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेटेड डिटेक्शन: यह तकनीक संदिग्ध और आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान स्वतः करने का काम करती है।
  • डेडिकेटेड ह्यूमन रिव्यू टीम: एक समर्पित समीक्षा दल जो स्वचालित प्रणालियों द्वारा फ्लैग किए गए कंटेंट की जांच करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय साझेदारी: कंपनी ने बच्चों के शोषण के खिलाफ काम करने वाले अमेरिकी संस्थान NSMEC यानी नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन के साथ भी रणनीतिक साझेदारी की हुई है।

इन सभी प्रणालियों के होने के बावजूद, सरकार इस बात पर अड़ी है कि कंपनी को यह ठोस रूप से बताना होगा कि इस बार उनकी यह पूरी बहुस्तरीय तकनीक और समीक्षा प्रक्रिया कैसे निष्प्रभावी साबित हुई।

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