अशोकनगर के स्कूल में गुंडागर्दी, महिला शिक्षिका को कक्षा में फर्श पर पटका, चाचा की नौकरी जाने का बदला लेने के लिए दी जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के भीतर महिला शिक्षिका पर दबंग युवक द्वारा जानलेवा हमला करने का मामला सामने आया है। आरोपी ने अपने चाचा को अतिथि शिक्षक के पद से हटाए जाने का बदला लेने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया।

मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां शिक्षा के मंदिर में एक महिला शिक्षिका के साथ सरेआम गुंडागर्दी और मारपीट की गई। सरकारी प्राथमिक स्कूल के भीतर क्लास में बच्चों को पढ़ा रही एक युवा शिक्षिका पर गांव के ही एक दबंग युवक ने जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना ने न केवल स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षकों में भारी असुरक्षा और रोष की भावना पैदा कर दी है।

शासकीय स्कूल के भीतर सरेआम गुंडागर्दी

यह शर्मनाक वारदात अशोकनगर जिले के ग्राम देवछरी में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में घटित हुई। मूल रूप से मध्य प्रदेश के नीमच जिले की रहने वाली 24 वर्षीय शिक्षिका मीनू पनेरिया साल 2023 से इस स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं और पूरी निष्ठा के साथ बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। बुधवार की सुबह करीब 11:30 बजे जब मीनू पनेरिया हमेशा की तरह स्कूल की कक्षा 6वीं और 8वीं के छात्र-छात्राओं को पढ़ा रही थीं, तभी गांव का रहने वाला सुमित यादव नाम का एक युवक अचानक जबरन उनकी कक्षा में घुस आया। कक्षा में आते ही आरोपी ने महिला शिक्षिका के साथ गाली-गलौज और अभद्रता करना शुरू कर दिया।

चाचा की नौकरी जाने का बदला लेने की सनक

वारदात के पीछे की वजह आरोपी के चाचा की नौकरी जाना बताई जा रही है। आरोपी सुमित यादव इस बात से बहुत नाराज था कि मीनू पनेरिया की नियमित नियुक्ति होने की वजह से उसके चाचा पप्पू यादव को अतिथि शिक्षक के पद से हटा दिया गया है। आरोपी इसी बात का बदला लेने के इरादे से स्कूल पहुंचा था। वह क्लास में आते ही चिल्लाने लगा कि तुम्हारी वजह से ही मेरे चाचा को नौकरी गंवानी पड़ी है। जब शिक्षिका ने उसे शांत रहने और क्लास के भीतर इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने से रोका, तो आरोपी सुमित यादव बुरी तरह हिंसक हो उठा।

शिक्षिका को फर्श पर पटका और वाहन भी तोड़ा

गुस्से में पागल आरोपी ने शिक्षिका मीनू पनेरिया को जोर से धक्का दिया, जिससे वह फर्श पर गिर पड़ीं। जब शिक्षिका अपनी जान बचाने के लिए किसी तरह खड़ी होकर कक्षा से बाहर भागने लगीं, तो आरोपी ने उनका रास्ता रोक लिया। उसने कक्षा के भीतर रखी लोहे और प्लास्टिक की कुर्सियों को उठाकर जमीन पर पटकना शुरू कर दिया और उन्हें बाहर फेंक दिया। इसके बाद भी आरोपी का मन नहीं भरा, तो वह स्कूल परिसर के बाहर गया, जहां शिक्षिका की एक्टिवा गाड़ी खड़ी थी। उसने भारी पत्थरों से हमला कर शिक्षिका की गाड़ी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

भागने से पहले आरोपी ने शिक्षिका को सरेआम जान से मारने की धमकी दी। उसने कहा कि वह जल्द से जल्द इस स्कूल से अपना तबादला करवा लें, अन्यथा वह उन्हें जान से मारकर फेंक देगा। इस पूरी घटना के दौरान स्कूल के मासूम बच्चे अपनी आंखों के सामने अपनी शिक्षिका के साथ हो रही इस बदसलूकी को देखकर बुरी तरह सहम गए और पूरी क्लास में डर का माहौल बन गया।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, शिक्षक संघों में भारी आक्रोश

इस खौफनाक वारदात के तुरंत बाद पीड़ित शिक्षिका मीनू पनेरिया ने थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सुमित यादव के खिलाफ SC-ST एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत और गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।

इस बीच, इस अमानवीय घटना को लेकर मध्य प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। कई स्थानों पर शिक्षक संघों ने एकजुट होकर स्थानीय जिला प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने इस घटना पर गहरी आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि:

  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा दे रहे सभी शिक्षकों, विशेषकर महिला शिक्षिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाए जाएं।
  • पीड़ित शिक्षिका मीनू पनेरिया को सुरक्षा प्रदान की जाए और उनकी सुरक्षा के मद्देनजर उनका स्थानांतरण किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर किया जाए।
  • स्कूल जैसे सार्वजनिक और पवित्र स्थानों पर शिक्षकों के साथ इस प्रकार की अभद्र घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस गश्त और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि शिक्षक बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभा सकें।

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले शिक्षक ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो देश का भविष्य संवारने वाले बच्चे भयमुक्त वातावरण में कैसे शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे।

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