राजस्थान में मानसून की रफ्तार तेज, बारिश के बीच पौधारोपण के लिए उमड़ी लोगों की भीड़

राजस्थान में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है, जिससे राजधानी जयपुर सहित कई जिलों में मौसम खुशनुमा बना हुआ है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद प्रदेश भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण का अभियान भी जोरों पर है।

राजस्थान में सक्रिय हुआ मानसून

राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद मानसून ने अब अपनी पूरी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है। पूर्वी राजस्थान में मानसून के प्रवेश के बाद से ही बारिश की गतिविधियों में लगातार तेजी देखी जा रही है। राजधानी जयपुर की बात करें तो यहाँ रात भर रुक-रुक कर हुई बारिश ने पूरे मौसम का मिजाज बदल दिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। सड़कों और सार्वजनिक पार्कों का नजारा अब हरियाली से सराबोर दिखाई दे रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा अभी टोंक, जयपुर और अलवर के क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ रही है, जिसके चलते पूर्वी राजस्थान के हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। आने वाले दो से तीन दिनों में मानसून के प्रदेश के अन्य भागों में भी तेजी से विस्तार होने की उम्मीद है, जिससे बारिश का दायरा और अधिक बढ़ेगा।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और अलर्ट

मौसम विभाग ने आगामी दिनों को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है। अगले 5 से 7 दिनों तक पूर्वी राजस्थान में मानसून के पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के वैज्ञानिकों के मुताबिक, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और जयपुर संभाग में आज के दिन मध्यम से लेकर भारी बारिश होने के आसार हैं। इन क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ तेज बारिश की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता के कारण कई इलाकों में भारी से लेकर अतिभारी बारिश भी देखने को मिल सकती है। केवल पूर्वी राजस्थान ही नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान में भी मौसम का मिजाज बदलने लगा है। जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी अब आंधी के साथ बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने के संकेत दिए गए हैं।

पौधारोपण के लिए नर्सरियों में उमड़ी भीड़

मानसून की पहली अच्छी बारिश ने न केवल तापमान को नियंत्रित किया है, बल्कि प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक अनुकूल वातावरण तैयार कर दिया है। बारिश शुरू होते ही जयपुर सहित प्रदेश भर में वन विभाग की नर्सरियों पर पौधे खरीदने वालों की भारी भीड़ देखी जा रही है। मानसून में देरी के कारण जो पौधारोपण अभियान थोड़ा धीमा पड़ गया था, उसने अब बारिश के आगमन के साथ ही नई रफ्तार पकड़ ली है। युवा, बच्चे और परिवार के लोग बड़ी संख्या में नर्सरियों से पौधे लेकर अपने घर, खेतों और आसपास के खाली क्षेत्रों में पौधारोपण कर रहे हैं। वन विभाग ने इस वर्ष पूरे राजस्थान में कुल 10 करोड़ पौधे लगाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

नर्सरियों में पौधों की भारी मांग

वन विभाग द्वारा लोगों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए रियायती दरों पर पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नर्सरियों में नीम, पीपल, अमलतास और गुलमोहर जैसे छायादार पौधों की सबसे अधिक मांग बनी हुई है। इसके अलावा फलदार पौधों को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की बारिश के बाद मिट्टी में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जो छोटे पौधों की जड़ें जमने और उनके विकास के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। इसी वजह से लोग इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहते।

'हरयाळो राजस्थान' अभियान को मिला बल

राज्य सरकार के 'हरयाळो राजस्थान' अभियान को इस बार मानसून की बारिश से बड़ा सहारा और नई ऊर्जा मिली है। वन विभाग ने मानसून की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी नर्सरियों में पौधों की उपलब्धता को भी काफी बढ़ा दिया है। विभागीय अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इस साल आम जनता की सक्रिय भागीदारी पिछले सभी वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ देगी, जिससे निर्धारित 10 करोड़ पौधों के लक्ष्य को समय रहते सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, राजस्थान में मानसून अब राहत लेकर आया है और हरियाली के विस्तार का एक सुनहरा अवसर भी प्रदान कर रहा है।

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