चंद्रबल का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक और एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। चंद्रबल का सरल अर्थ है चंद्रमा की शुभता या उसकी शक्ति। जब भी आप जीवन के किसी महत्वपूर्ण पड़ाव या शुभ कार्य की शुरुआत करते हैं, तो उस विशेष समय पर चंद्रमा की स्थिति का आपके लिए अनुकूल होना बहुत जरूरी होता है। यदि चंद्रबल आपके पक्ष में है, तो सफलता मिलने की संभावनाएं काफी अधिक हो जाती हैं। यही कारण है कि विवाह, मुंडन या अन्य मांगलिक अनुष्ठानों के दौरान पंडित और विद्वान हमेशा चंद्रबल की गणना को प्राथमिकता देते हैं।
अपनी चंद्र राशि कैसे पहचानें
चंद्रबल की गणना करने के लिए सबसे पहले आपको अपनी चंद्र राशि यानी जन्म राशि का ज्ञान होना चाहिए। आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में स्थित होता है, वही आपकी चंद्र राशि कहलाती है। यदि आपको अपनी राशि की जानकारी नहीं है, तो आप अपनी जन्म तिथि और जन्म समय का उपयोग करके ऑनलाइन पंचांग के माध्यम से इसे आसानी से जान सकते हैं। चंद्रमा व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक बल प्रदान करता है, इसलिए कार्य शुरू करने से पहले उसका शक्तिशाली होना आपको सकारात्मक ऊर्जा और उत्तम वैचारिक शक्ति प्रदान करता है।
चंद्रबल देखने का सही तरीका
चंद्रबल की सटीक गणना करने के लिए आपको दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देना होता है। पहली आपकी स्वयं की चंद्र राशि और दूसरी यह कि वर्तमान में चंद्रमा आकाश मंडल की किस राशि में गोचर कर रहे हैं। इन दोनों के बीच के संबंध को समझकर ही चंद्रबल का आकलन किया जा सकता है।
गणना करने की विधि और नियम
- यदि आज के दिन चंद्रमा आपकी चंद्र राशि से 1, 3, 6, 7, 10 और 11वें स्थान पर स्थित है, तो इसे शुभ चंद्रबल माना जाता है।
- इसके विपरीत, यदि चंद्रमा आपकी राशि से 2, 4, 5, 8, 9 और 12वें भाव में गोचर कर रहे हैं, तो चंद्रबल कमजोर या अशुभ माना जाता है।
उदाहरण के तौर पर इसे समझें। यदि आपकी चंद्र राशि सिंह है और वर्तमान में चंद्रमा वृश्चिक राशि में है, तो सिंह राशि से वृश्चिक राशि चौथे भाव में पड़ती है। ऐसी स्थिति में उस समय चंद्रबल कमजोर रहेगा। वहीं, यदि किसी की राशि कन्या है, तो कन्या से वृश्चिक राशि तीसरे भाव में होने के कारण उनके लिए चंद्रबल शुभ और लाभकारी सिद्ध होगा।
शुभ और अशुभ भाव
- चंद्रमा का 7, 10 और 11वें भाव में होना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस अवधि में आप बिना किसी संकोच के अपने महत्वपूर्ण शुभ कार्य प्रारंभ कर सकते हैं।
- दूसरी ओर, चंद्रमा का 4, 8 और 12वें भाव में स्थित होना सबसे अशुभ माना जाता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय के दौरान कोई भी नया या बड़ा काम शुरू करने से बचना चाहिए।
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