सफलता की कहानी: IIT और IISc के पूर्व छात्र त्रपित बंसल को मेटा ने दिया 800 करोड़ रुपये का पैकेज, जानें उनके सफर की पूरी कहानी

आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और एआई रिसर्चर त्रपित बंसल को मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा ने करीब 800 करोड़ रुपये के भारी-भरकम सैलरी पैकेज पर अपनी टीम में शामिल किया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया इस समय सबसे बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। दुनिया की तमाम बड़ी टेक कंपनियों के बीच इस क्षेत्र में खुद को सबसे आगे साबित करने की एक जंग छिड़ी हुई है। इस रेस में बढ़त हासिल करने के लिए कंपनियां न केवल नए और आधुनिक टूल्स बना रही हैं, बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन दिमागों को अपने साथ जोड़ने के लिए पानी की तरह पैसा भी बहा रही हैं। इसी कड़ी में भारतीय मूल के एक युवा AI रिसर्चर त्रपित बंसल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने इस युवा वैज्ञानिक को अपनी नई रिसर्च विंग में शामिल करने के लिए करीब 800 करोड़ रुपये का शानदार सैलरी पैकेज ऑफर किया है।

मेटा के इस बड़े कदम के बाद हर तरफ त्रपित बंसल के नाम की चर्चा हो रही है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर इस युवा रिसर्चर में ऐसा क्या खास है जिसके लिए टेक जगत की इतनी बड़ी कंपनी भारी-भरकम पैकेज देने को तैयार हो गई। त्रपित की यह सफलता कोई रातों-रात मिली किस्मत की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक दशक से भी अधिक समय की कड़ी मेहनत, रिसर्च के प्रति गहरा समर्पण और मजबूत बुनियादी शिक्षा की एक लंबी यात्रा छिपी हुई है।

IIT कानपुर और IISc बेंगलुरु से शुरू हुआ सफर

त्रपित बंसल के इस शानदार करियर की नींव भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रखी गई थी। आमतौर पर कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में जाने वाले छात्र कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की तरफ रुख करते हैं, लेकिन त्रपित ने एक अलग और बेहद मजबूत रास्ता चुना। उन्होंने साल 2007 से 2012 के बीच IIT कानपुर से गणित और सांख्यिकी में अपनी इंटीग्रेटेड एमएससी की डिग्री पूरी की।

यह फैसला उनके करियर के लिए सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ क्योंकि आज की तारीख में मशीन लर्निंग और AI की पूरी तकनीक गणितीय सिद्धांतों और सांख्यिकी के मजबूत आधार पर ही टिकी हुई है। इसके बाद उन्होंने अपने रिसर्च के सफर को आगे बढ़ाते हुए बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) का रुख किया। यहां उन्होंने संस्थान की मशीन लर्निंग लैब में लगभग 2 साल तक रिसर्च असिस्टेंट के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने मशीन लर्निंग के एडवांस सिद्धांतों को बेहद करीब से समझा और उन पर व्यावहारिक प्रयोग किए।

अमेरिका में उच्च शिक्षा और दुनिया की शीर्ष कंपनियों में काम का अनुभव

भारत में अपनी बुनियादी पढ़ाई और शुरुआती रिसर्च पूरी करने के बाद त्रपित बंसल ने आगे के सफर के लिए अमेरिका की राह चुनी। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट से कंप्यूटर साइंस में अपनी मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री हासिल की। अपनी पीएचडी रिसर्च के दौरान त्रपित ने NLP (नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग), डीप लर्निंग और मेटा-लर्निंग जैसे बेहद जटिल और आधुनिक विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत की।

अपनी पढ़ाई और डॉक्टरेट की रिसर्च के दौरान ही त्रपित ने दुनिया की सबसे दिग्गज तकनीकी कंपनियों में इंटर्नशिप की। इन इंटर्नशिप के जरिए उन्हें वास्तविक दुनिया की तकनीकी चुनौतियों को समझने का मौका मिला:

  • फेसबुक (मेटा): यहां उन्होंने NLP के लिए डीप लर्निंग तकनीकों पर गहन रिसर्च की।
  • गूगल: इस वैश्विक सर्च दिग्गज के साथ काम करते हुए उन्होंने डीप लर्निंग और नॉलेज ग्राफ पर अपने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को अंजाम दिया।
  • माइक्रोसॉफ्ट: इस कंपनी में उन्होंने NLP और मेटा-लर्निंग की आधुनिक तकनीकों के विकास पर योगदान दिया।
  • ओपनएआई: इस अग्रणी AI संस्थान में उन्होंने मल्टी-एजेंट रीइन्फोर्समेंट लर्निंग प्रोजेक्ट्स पर काम किया।

ओपनएआई में बड़ी भूमिका और फिर मेटा में ऐतिहासिक एंट्री

अपनी पीएचडी पूरी करने के बाद साल 2022 में त्रपित बंसल आधिकारिक तौर पर ओपनएआई की कोर टेक्निकल टीम का हिस्सा बन गए। ओपनएआई में रहते हुए उन्होंने एआई की दुनिया के सबसे सम्मानित वैज्ञानिकों में से एक इल्या सुतस्केवर के साथ काम किया। इस दौरान त्रपित ने रीइन्फोर्समेंट लर्निंग और रीजनिंग पर आधारित आधुनिक एआई मॉडल्स को विकसित करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विशेष रूप से ओपनएआई के सबसे चर्चित और क्रांतिकारी 01 रीजनिंग मॉडल फैमिली को बनाने में त्रपित बंसल के योगदान को बहुत अहम माना जाता है। उनके इसी असाधारण अनुभव और एआई क्षेत्र में उनकी महारत को देखते हुए साल 2025 में मेटा ने उन्हें अपनी नई एआई रिसर्च डिवीजन में बतौर फाउंडिंग रिसर्चर नियुक्त किया। इसी नियुक्ति के साथ उन्हें करीब 800 करोड़ रुपये का यह ऐतिहासिक सैलरी पैकेज भी दिया गया है।

आज के युवाओं के लिए त्रपित बंसल का सफर एक बड़ी सीख

आज के इस दौर में जहां अधिकांश युवा छोटे-मोटे शॉर्ट-टर्म कोर्स करके या जल्दबाजी में कोई भी नौकरी पाकर संतुष्ट हो जाना चाहते हैं, वहीं त्रपित बंसल की कहानी एक बहुत बड़ा सबक सिखाती है। उनकी यह सफलता किसी चमत्कार का परिणाम नहीं है। इस 800 करोड़ रुपये के पैकेज के पीछे 10 से 12 सालों की निरंतर पढ़ाई, दिन-रात की गई रिसर्च, अनगिनत इंटर्नशिप्स और असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने का एक लंबा सफर है।

त्रपित बंसल की यह प्रेरक कहानी यह साबित करती है कि यदि आप अपने विषय की बुनियादी समझ को बेहद मजबूत कर लेते हैं और उसमें गहरी विशेषज्ञता हासिल करते हैं, तो दुनिया की कोई भी बड़ी ताकत या कंपनी आपकी काबिलियत को नजरअंदाज नहीं कर सकती। सही दिशा में की गई लंबी मेहनत का फल हमेशा ही असाधारण होता है।

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