देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही बिहार में बारिश का इंतजार भी अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून 4 जून को केरल पहुंच गया। आमतौर पर हर साल यह 1 जून को केरल में दस्तक देता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री करीब 4 दिन की देरी से हुई है। माना जा रहा है कि इस देरी का असर बिहार में मानसून के आगमन पर भी पड़ेगा।
राज्य में खेती-किसानी का बड़ा हिस्सा मानसून पर ही टिका है, इसलिए समय पर और भरपूर बारिश को लेकर किसानों और आम लोगों की निगाहें मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर लगी हुई हैं। मानसून के आते ही लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
बिहार में कब आएगा मानसून?
सामान्य तौर पर बिहार में मानसून 15 जून के आसपास पहुंच जाता है, लेकिन इस साल इसके 4 से 5 दिन देर से आने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य में मानसून की पहली दस्तक 18 से 20 जून के बीच देखने को मिल सकती है।
किस रास्ते से होती है बिहार में एंट्री?
बिहार में मानसून हमेशा पूर्वी हिस्से से प्रवेश करता है। पश्चिम बंगाल के रास्ते सबसे पहले यह पूर्णिया और किशनगंज जिलों में पहुंचता है और इसके बाद धीरे-धीरे राज्य के बाकी हिस्सों में फैलता जाता है।
किस जिले में कब पहुंचेगा मानसून?
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार मानसून 18 से 20 जून के बीच पूर्णिया और किशनगंज के रास्ते बिहार में दाखिल होगा। इसके बाद यह क्रमशः राज्य के अन्य इलाकों की ओर बढ़ेगा।
- राजधानी पटना और गया में मानसून के करीब 22 जून तक पहुंचने की संभावना है।
- छपरा समेत उत्तर-पश्चिम बिहार के जिलों में 24 जून के आसपास मानसून सक्रिय हो सकता है।
- अगर मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 25 जून तक पूरे बिहार में मानसूनी बारिश शुरू हो जाएगी।
हर साल कैसे पहुंचता है मानसून?
मई और जून में जमीन काफी तप जाती है। गर्म जमीन के ऊपर मौजूद हवा भी गर्म होकर ऊपर उठने लगती है, जिससे बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में कम दबाव (Low Pressure) का क्षेत्र बन जाता है। दूसरी ओर हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर की हवा अपेक्षाकृत ठंडी रहती है।
हवा हमेशा कम दबाव वाले इलाके की ओर दौड़ती है, इसलिए समुद्र से नमी से भरी हवाएं भारत की ओर बढ़ने लगती हैं। बिहार तक मानसून मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी शाखा से पहुंचता है। ये हवाएं पहले अंडमान-निकोबार, फिर पश्चिम बंगाल और उसके बाद बिहार में प्रवेश करती हैं। इन हवाओं के साथ समुद्र का काफी पानी भाप के रूप में मौजूद रहता है। जब ये हवाएं ऊपर उठकर ठंडी होती हैं, तो बादल बनते हैं और बारिश शुरू हो जाती है।
इस बार कमजोर रह सकती है मानसून की रफ्तार
IMD ने हाल ही में अपने मौसमी पूर्वानुमान में बदलाव करते हुए कहा है कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। विभाग का अनुमान है कि पूरे मानसून सीजन में देश में औसत बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का करीब 90 प्रतिशत रह सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे एल नीनो (El Nino) की स्थिति जिम्मेदार हो सकती है। फिलहाल प्रशांत महासागर में न्यूट्रल स्थिति धीरे-धीरे एल नीनो की ओर बढ़ रही है। जून में इसका असर कमजोर रह सकता है, लेकिन सितंबर तक यह मध्यम या मजबूत रूप ले सकता है।
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